Mulla Nasruddin Story मुल्ला नसरुद्दीन और दार्शनिक

Mulla Nasruddin Story मुल्ला नसरुद्दीन और दार्शनिक

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एक बार मुल्ला नसरुद्दीन एक पुस्तकालय में गए. वहाँ उनकी मुलाक़ात एक दार्शनिक से हुई. दार्शनिक मुल्ला की हाजिरजवाबी और अक्लमंदी की बातों से बहुत प्रभावित हुआ.

बातों बातों में दार्शनिक और मुल्ला की अच्छी दोस्ती हो गई. मुल्ला ने  चलते समय दार्शनिक को अपने घर पर आने के लिए आमंत्रित किया. दार्शनिक ने मुल्ला का निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा, “ठीक है, बुधवार दोपहर को तुम्हारे घर आता हूँ.”

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बुधवार का दिन आया तो मुल्ला किसी जरूरी काम से बाहर चला गया. उसे याद ही नहीं रहा कि आज दार्शनिक उसके घर आने वाला है. उधर दार्शनिक नियत समय पर मुल्ला के घर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया. मुल्ला की पत्नी ने बिना दरवाजा खोले ही कह दिया कि वे घर पर नहीं है.

दार्शनिक को बहुत गुस्सा आया. उसने सोचा कि ये कैसा आदमी है जो मुझे बुलाने के बाद खुद घर से चला गया. उसने मुल्ला के दरवाजे पर “मूर्ख” लिख दिया और चलाया आया.

शाम को जब मुल्ला वापस घर आया तो उसने दरवाजे पर “मूर्ख” लिखा देखा. वह तुरंत समझ गया कि क्या हुआ होगा और ये किसने लिखा होगा. वह तुरंत दार्शनिक के घर के लिए रवाना हो गया.

दार्शनिक के पास पहुंचकर मुल्ला ने कहा, “मुझे माफ़ करें, मैं तो आपको अपने घर बुलाकर भूल ही गया था. वह तो जब मैं घर लौटा और दरवाजे पर आपका नाम लिखा देखा तो याद आया कि आज तो आपसे मुलाक़ात होनी थी. मैं तुरंत आपके पास चला आया.”

दार्शनिक एक बार फिर मुल्ला की विनोदी प्रवृत्ति का कायल हो गया और उठकर तुरंत मुल्ला के साथ उसके घर चल दिया.

(A Funny story of Mulla Nasruddin)

 

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