मुल्ला नसरुद्दीन और बेईमान पड़ोसी (Mulla Nasruddin Story in Hindi)

मुल्ला नसरुद्दीन और बेईमान पड़ोसी (Mulla Nasruddin Story in Hindi)

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मुल्ला नसरुद्दीन (Mulla Nasruddin) के पड़ोस में एक निहायत ही बेईमान आदमी रहता था. वह हमेशा दूसरों की चीज़ें हड़पने की कोशिश करता रहता था. पूरा मोहल्ला उसकी आदत से परेशान था.

आखिर एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन ने उसे सबक सिखाने की सोची. वह उसके घर गया और बोला – “भाई, एक रात के लिए अपना भगोना (बर्तन) मुझे दे दो … मेरी बीवी मायके गई हुई है और मुझे चावल पकाने के लिए बर्तन घर में मिल नहीं रहा है !”

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बेईमान पड़ोसी ने मुल्ला को अपना भगोना दे दिया.

दूसरे दिन मुल्ला उस पड़ोसी का भगोना और उसके साथ एक छोटा भगोना लेकर उसके घर पहुंचा. छोटा भगोना देखकर पड़ोसी बोला – “ये छोटा भगोना किसका है ?”

मुल्ला बोला – “पता नहीं … सुबह जब मैं जागा तो यह तुम्हारे भगोने के बगल में रखा हुआ मिला. लगता है तुम्हारे भगोने ने रात में इसे जनम दिया है.”

बेईमान पड़ोसी यह सुनकर खुश हो गया – “हाँ, हाँ तुम बिलकुल सही कह रहे हो … यह इसी का बच्चा है !”, और इतना कहकर उसने दोनों भगोने रख लिए.

कुछ दिनों बाद मुल्ला फिर उसी पड़ोसी के घर पहुंचा और सुबह वापस करने को कहकर और भी बड़ा बरतन मांग आया. पड़ोसी ने भी ख़ुशी-ख़ुशी दे दिया.

लेकिन इस बार काफी दिन बीत गए पर मुल्ला बरतन वापस करने नहीं गया.

आखिर एक दिन बेईमान पड़ोसी मुल्ला के घर पहुंचा – “क्यों मुल्ला ? तुम मेरा बरतन वापस करने नहीं आये ?”

मुल्ला बोला – “अरे मियाँ शायद आपको खबर नहीं …. वो तो जिस रात मैं तुम्हारे घर से लाया था उसी रात मर गया !”

पड़ोसी बोला – “क्या बकवास कर रहे हो ? बरतन भी कहीं मरते हैं क्या ?”

मुल्ला – “क्यों भाई ? जब बरतन जनम दे सकते हैं तो मर क्यों नहीं सकते ?”

चूंकि दोनों ही घटनाएं पूरे मोहल्ले के सामने हुईं थीं, इसलिए बेईमान पडोसी कुछ न कह सका और मन ही मन कुढ़ता हुआ अपने घर चला गया.

(Mulla Nasruddin funny story)

 

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