नजरिया (Motivational story)

नजरिया (Motivational story)

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मनुष्य जीवन में अनेक प्रकार की परिस्थितियाँ आती रहती हैं. नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति किसी परिस्थिति से परेशान हो जाता है तो सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति उसी परिस्थिति में कुछ अच्छा ढूँढ निकालता है. सब-कुछ चीज़ों को आपके देखने के नजरिये पर निर्भर करता है. इसी सोच के साथ लिखी गई यह कहानी आपको बहुमूल्य जीवनोपयोगी सीख देगी –

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एक लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था…

“पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गालब्लाडर निकाल दिया गया. इस आपरेशन के कारण मुझे बहुत लंबे  समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा …

इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और मुझे रिटायर कर दिया गया. मेरी पसंदीदा नौकरी चली गयी …

इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुःख भी झेलना पड़ा …

और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परीक्षा में फेल हो गया क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा. कार की टूट-फूट का नुकसान हुआ सो अलग … !”

अंत में लेखक ने लिखा – “यह बहुत ही बुरा साल था…”

उसी समय लेखक की पत्नी लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि, उसका पति बहुत दुखी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है. अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वो क्या लिख रहा था.

वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दूसरे कागज़ के साथ वापस लौटी और वह कागज़  उसने अपने पति के लिखे हुए कागज़ के बगल में रख दिया.

लेखक ने पत्नी के रखे कागज़ पर देखा तो उसे कुछ लिखा हुआ नजर आया. उसने पढ़ा –

“पिछले साल आखिर मुझे उस गालब्लाडर से छुटकारा मिल गया जिसके कारण मैं कई सालों से दर्द से परेशान था.

इसी साल मैं 60 वर्ष का होकर स्वस्थ दुरस्त अपनी प्रकाशन कम्पनी की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ. अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शान्ति के साथ अपने समय का उपयोग और बढ़िया लिखने के लिए कर पाउँगा.

इसी साल मेरे 95 वर्ष के पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमार हुए परमात्मा के पास चले गए.

इसी साल भगवान ने एक्सिडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की. कार टूट-फूट गई लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई. उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाथ-पाँव भी सही सलामत हैं.”

अंत में उसकी पत्नी ने लिखा था – “इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही, साल अच्छा बीता…!”

Via – Facebook

 

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