Home News दो महीने बिस्तर पर पड़े रहने के NASA दे रही है तेरह...

दो महीने बिस्तर पर पड़े रहने के NASA दे रही है तेरह लाख रुपये

0

अन्तरिक्ष यात्रा सिर्फ मंहगी ही नहीं होती, यह बेहद खतरनाक भी होती है. पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में रहने का आदी मानव शरीर जब अंतरिक्ष की शून्य ग्रेविटी में प्रवेश करता है तो उस पर बेहद गंभीर असर होते हैं. इसी बात का अध्ययन करने के लिए अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ESA मिलकर कुछ ऐसे वालंटियर्स की खोज कर रहे हैं जो उनके इस अध्ययन का हिस्सा बन सकें.

इन चुने हुए वालंटियर्स को करीब 60 दिनों तक बिस्तर में रहना होगा और इसके लिए उन्हें 16500 यूरो (भारतीय रुपयों में करीब तेरह लाख रुपये) का भुगतान किया जाएगा. इस बेडरेस्ट एक्सपेरिमेंट का उद्देश्य माइक्रोग्रेविटी का मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है. जब कोई एस्ट्रोनॉट अन्तरिक्ष में लम्बा समय गुजारता है तो उसकी मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और शरीर में रक्तसंचार का तरीका बदल जाता है.

इस दौरान प्रतिभागियों के एक ग्रुप को आर्टिफीसियल ग्रेविटी चैम्बर में रखा जाएगा जहां वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन करेंगे कि इस तरह का कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकता है या नहीं.

यह अध्ययन जर्मनी के कोलोन में जर्मन एयरोस्पेस सेंटर में होगा. कुल अध्ययन 89 दिनों तक चलेगा जिसमें से 60 दिन बिस्तर में रहना होगा. बिस्तर में रहने के दौरान प्रतिभागी की टाँगे सर के मुकाबले थोड़ी ऊंची रखी जायेगी ताकि उनमें रक्तप्रवाह कम हो जैसा कि अन्तरिक्ष यात्रियों को झेलना पड़ता है.

हालांकि इतनी बड़ी रकम सुनकर किसी के भी मुंह में पानी आ सकता है लेकिन इसके लिए स्पेस एजेंसीज का चुनाव अपने मानदंडों के आधार पर करेंगी. जैसे कि प्रतिभागी को 24 से 55 साल के बीच का होना चाहिए, उसे जर्मन भाषा का ज्ञान होना चाहिए आदि.

इस दौरान वालंटियर को खाना खाने और नित्यकर्म जैसे काम भी लेटी हुई अवस्था में ही करने होंगे. मनोरंजन के लिए टीवी की व्यवस्था रहेगी साथ ही पढ़ने के शौकीनों के लिए किताबें भी होंगी.

(Source : BoredPanda)

Subscribe our YouTube channel -