दस रुपये वसूलने के लिए खर्च कर दिए तैतीस हजार रुपये

दस रुपये वसूलने के लिए खर्च कर दिए तैतीस हजार रुपये

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आम जनता के टैक्स के पैसों को हमारे सरकारी महकमे कितनी बुद्दिमत्ता से खर्च करते हैं, इसका एक बेहतरीन उदाहरण हाल ही में प्रकाश में आया है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक आरटीआई एक्टिविस्ट से 10 रुपये वसूलने के लिए लगभग तैंतीस हजार रुपये खर्च कर डाले हैं.

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हुआ यूँ कि एक RTI कार्यकर्ता आलोक कुमार घोष को NGT से सूचना के अधिकार के तहत कुछ जानकारी निकलवानी थी. इसके लिए उन्होंने फीस के बतौर दस रुपये का कोर्ट स्टाम्प आवेदन के साथ संलग्न किया.

NGT ने यह  दलील देते हुए, कि फीस केवल डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल आर्डर के रूप में ही स्वीकार की जा सकती है, न कि कोर्ट स्टाम्प के रूप में, उनका आवेदन अस्वीकार करते हुए जानकारी देने से मना कर दिया.

घोष ने इस बात की शिकायत केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)  में की तो NGT ने भी CIC के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए वकील नियुक्त कर दिये. इन वकीलों का काम CIC को यह समझाना था कि सूचना प्राप्त करने के लिए 10 रुपये का IPO (Indian Postal Order) कितना जरूरी था.

और इन वकीलों का खर्च आया लगभग 31000 रुपये !

सूचना आयुक्त महोदय यह जान कर हैरान रह गए कि NGT  मात्र 10 रुपये के लिए, इस मामले में डाक खर्च सहित लगभग 33050 रुपये खर्च कर चुका है. उन्होंने न केवल NGT को इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यवाही के लिए फटकार लगाईं बल्कि एक स्पष्टीकरण भी माँगा कि क्यों न NGT आवेदक को सूचना प्रदान न करने के कृत्य के लिए हर्जाना दे !

खैर, अपने को क्या ? अपना काम है टैक्स देना और फिर आराम से उस पैसे की बर्बादी होते हुए देखना ! बस !

Source : TimesOfIndia

 

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