शराफत का तो ज़माना ही नहीं है

शराफत का तो ज़माना ही नहीं है

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सीधे-सादे सच्चे लोग सबको अच्छे लगते हैं लेकिन यदि  धंधा टेढ़ा हो तो यही सीधा-सादा सच्चा-पन आपको मुसीबत में डाल सकता है.  या तो स्वभाव बदल लें या फिर धंधा बदल लें. उदाहरण के लिए इसी घटना को ले लीजिए.

डलास शहर के वेल्स फ़ार्गो बैंक को नाथन वायने नामक व्यक्ति ने लूटने की कोशिश की.  नाथन ने बैंक के कैशिअर  को धमकाते हुए नगदी उसके हवाले करने को कहा.  कैशिअर ने  नगदी सौंपने से  पहले   उससे वैध  पहचान-पत्र दिखाने को कहा,  जैसे कि वह अन्य ग्राहकों से कहा करता था.  बेचारा भोला-भाला नाथन,  उसने किसी भी शरीफ आदमी की तरह एक की जगह दो-दो पहचान-पत्र उस कैशिअर के  हवाले कर दिए और नगदी लेकर चलता बना.

कहने की जरूरत नहीं कि पुलिस को नाथन को गिरफ्तार करने में चंद ही मिनटों का समय लगा.  “शराफत का तो ज़माना ही नहीं है!” – बेचारा नाथन जेल में शायद यही सोच रहा होगा.

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(Based on Media Reports, 18-03-2011)

 

20 COMMENTS

  1. lamah lamah waqt guzar jayega,
    saat pheron ke saath koi tumse bandh jayega .
    abi bhi waqt hai kisi se affair ka lo,
    kya pata kal kaun sa model tumhe saunpaa jayega.

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