कहीं मेरा बेटा सुन न ले

कहीं मेरा बेटा सुन न ले

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एक पुरानी चीनी कहानी है.

एक नब्बे साल का बूढा अपने जवान बेटे के साथ अपने बगीचे में स्वयं जुत कर पानी खींच रहा था तभी कन्फ्यूशियस वहाँ से गुजरे.

उन्होंने देखा, नब्बे साल का बूढा, और उसका जवान बेटा, दोनों जुते हैं, पसीने से तरबतर हो रहे हैं, पानी खींच रहे हैं.

कन्फ्यूशियस को दया आई.

वो बूढ़े के पास जाकर बोले – “तुम्हें पता है कि अब तो शहरों में हमने घोड़ों से या बैलों से पानी खींचना शुरू कर दिया है ! तुम क्यों जुते हुए हो इसके भीतर ?”

बूढा बोला – “ज़रा धीरे बोलिए … मेरा बेटा सुन न ले ! आप थोड़ी देर से आइये जब मेरा बेटा घर भोजन करने के लिए चला जाए …”

जब बेटा चला गया तब कन्फ्यूशियस फिर वापस आये और बूढ़े से बोले – “तुमने बेटे को क्यों न सुनने दिया ?”

बूढा बोला – “मैं नब्बे साल का हूँ और अभी तीस साल के नौजवान से लड़ सकता हूँ. लेकिन अगर मैं अपने बेटे के बजाय इसमें घोड़े जुतवा दूँ तो नब्बे साल की उम्र में मेरे जैसा स्वास्थ्य फिर उसके पास नहीं होगा. स्वास्थ्य घोड़ों के पास होगा, मेरे बेटे के पास नहीं होगा. मैं जानता हूँ कि शहरों में घोड़े जुतने लगे हैं और यह भी जानता हूँ कि मशीनें भी बन गई हैं जो कुंए से पानी खींच लेती हैं. अगर मेरा बेटा इसके बारे में सुनेगा तो वो यही चाहेगा हम भी घोड़े और मशीन लगा लें लेकिन जब मशीनें पानी खीचेंगी तो बेटा क्या करेगा ? उसके स्वास्थ्य का क्या होगा ?”

कन्फ्यूशियस उस बूढ़े के सामने निरुत्तर हो गया और सिर झुका कर वहाँ से चला आया.

 

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