बूढ़े की सीख

बूढ़े की सीख

0
SHARE

एक गाँव के बाहर एक बूढ़ा आदमी नौजवानों को पेड़ पर चढ़ना उतरना सिखा रहा था. कई युवक पेड़ों पर चढ़ना उतरना सीख रहे थे.

एक युवक से बूढ़े ने कहा – “पेड़ पर चढ़ते उतरते समय बड़ी सावधानी की जरूरत होती है.”

old-man-teaching

युवक बोला – “इसमें कौनसी बड़ी बात है …”, ऐसा कहते हुए वह युवक वृक्ष की अंतिम चोटी पर पहुँच गया. बूढ़ा देखता रहा.

अब युवक बड़ी सावधानी से उतर रहा था.

जब युवक तीन चौथाई दूरी तक आ गया तो बूढा बोला – “बेटा, संभल कर उतरना, असावधानी व जल्दबाजी न करना…”

बूढ़े की बात सुनकर युवक को बड़ी हैरानी हुई.

वह सोचने लगा कि जब वह पेड़ की चोटी पर चढ़ रहा था तब तो बूढ़ा चुपचाप बैठा रहा, फिर वह उतरने लगा तब भी चुपचाप बैठा रहा, लेकिन अब ज़रा सी दूरी रह गई है तो मुझे सावधान कर रहा है.

जब उसने बूढ़े से यह बात कही तो तो बूढ़ा बोला – “मैं देख रहा था कि जब तुम नीचे उतर रहे थे तब तुम स्वयं ही सावधान थे. जब तुम बिलकुल नजदीक पहुंचे तब मैंने सावधान इसलिए किया क्योंकि लक्ष्य को सरल और समीप देखकर ही अक्सर लोग असावधानी बरतते हैं….”

इतना सुनकर युवक बूढ़े के आगे नतमस्तक हो गया.

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY