कहानी ‘ओनी’ नामक उस कुत्ते की, जो चिट्ठियां बांटता था

कहानी ‘ओनी’ नामक उस कुत्ते की, जो चिट्ठियां बांटता था

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1888 की सर्दियों की बात है जब ठण्ड से बचने का प्रयास करता हुआ एक छोटा सा कुत्ता न्यूयॉर्क के अल्बेनी डाकखाने में घुस आया. कुत्ता ठण्ड का मारा हुआ तो था ही, भूख का सताया हुआ भी था जो उसके शरीर पर उभरी हुईं हड्डियां साफ़ बयान कर रहीं थीं.

वहाँ काम कर रहे डाककर्मियों को उस पर दया आ गई और उन्होंने उसे थैलों के बीच में बैठने दिया. डाकखाने की इंचार्ज ने जब थैलों के बीच उसे बैठे देखा तो डाककर्मियों से पूछा कि ये कुत्ता यहाँ क्या कर रहा है. दयालु डाककर्मियों ने उसे भगाने के बजाए एक डाककर्मी का नाम ले दिया और कहा कि यह Owen (एक डाककर्मी) का कुत्ता है. और इस तरह कुत्ते का नाम पड़ गया Owney.

डाककर्मियों का प्यार मिला तो कुत्ता वहीं रहने लगा. डाककर्मी उसे खाना खिलाने लगे जिससे उसका स्वास्थ्य भी सुधर गया. फिर वह धीरे धीरे डाकियों के साथ इलाके में घूमने जाने लगा. कुत्ता समझदार प्राणी तो होता ही है सो धीरे धीरे उसे अपने इलाके के हर घर की अच्छी जानकारी हो गई.

अब डाकियों ने उससे भी डाकिये का काम लेना शुरू कर दिया. उसकी पीठ पर डाक का थैला बाँध दिया जाता और वह पूरे इलाके का चक्कर लगा आता. हर दुकान और मकान के आगे रुकता, लोग उसके थैले में अपनी अपनी चिट्ठी छांटकर ले लेते और उसे दुलार करते.

Owney डाकखाने में रहते रहते इतना घुलमिल गया था कि वह डाकविभाग से जुड़ी हर चीज़ को पहचानने लगा था. एक दिन वह स्टेशन पर गया तो उसने रेलगाड़ी में लगे डाक के डिब्बे को पहचान लिया और उसमें सवार हो गया. यह उसकी पहली यात्रा थी.

फिर तो Owney बार बार डाकगाड़ियों के साथ यात्रा पर जाने लगा. रेलवे क्लर्क भी उसे जाने देते थे क्योंकि उसके होने से डाक के थैले कभी गुम नहीं होते थे. वह डाक के थैलों के ऊपर बैठा रहता और जब उतारे जाते तो पीछे पीछे चल देता. वह सभी रेल डाक सेवा वाले लोगों को पहचान लेता था और उनके अलावा किसी और को थैलों को हाथ नहीं लगाने देता था.

एक बार Owney डाक के थैलों के साथ एक यात्रा पर था. जब गाडी पहुंची तो पता चला कि डाक का एक थैला गायब है और Owney भी नहीं मिल रहा है. डाककर्मी उसकी तलाश करते करते उस रास्ते पर आये जिससे होकर गाड़ी गुजरी थी. बीच रास्ते में एक जगह Owney गुम हुए डाक के थैले के ऊपर बैठा मिला.

Owney  कहीं खो न जाए इसलिए अलवाने के डाककर्मियों ने उसके गले में एक खूबसूरत सा पट्टा बाँध दिया था जिस पर एक पीतल ला तमगा लगा हुआ था. इस तमगे पर Owney का नाम और पूरा पता अंकित था.

जीवन के सत्रह वर्षों में उसने खूब यात्राएँ कीं. अमेरिका में जहां जहां तक डाकगाड़ियां जाती थीं वह उन सभी जगहों पर घूमा. यहाँ तक कि अंतर्राष्ट्रीय डाक के साथ उसने विदेशयात्राएँ भी कीं. एक बार तो उसे चार महीनों के लिए डाक के थैलों के साथ एशिया और यूरोप की यात्रा पर भेजा और वापसी पर दुनिया भर के अखबारों में उसके बारे में छपा.

जब वह बूढ़ा होने लगा तो कुछ चिडचिडा सा हो गया. एक दिन न जाने क्यों उसे टोलेडो के एक पोस्टल क्लर्क से चिढ़ हो गई. उसने उसे काट लिया. वह उसे देखते ही बार बार काटने को दौड़ने लगा. पोस्टमॉस्टर से शिकायत की गई. पोस्टमॉस्टर ने पुलिस से कहा कि इस कुत्ते से उन्हें छुटकारा दिलाया जाए.

Owney के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया तो आख़िरकार निश्चय किया गया कि उसे गोली मार दी जाए. और फिर एक पुलिस ऑफिसर ने उसे गोली मार कर इस संसार से रुखसत कर दिया.

Owney अमेरिका का सबसे लोकप्रिय कुत्ता था जिसे विदेशों में भी लोग जानते थे. आज भी उसका संरक्षित शरीर नेशनल पोस्टल म्यूजियम वाशिंगटन डी.सी. में रखा हुआ है.

(All images: Wikipedia)

 

 

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