1857 नहीं, अब 1817 का पाइका विद्रोह माना जाएगा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

1857 नहीं, अब 1817 का पाइका विद्रोह माना जाएगा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

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अब तक इतिहास की किताबों में हम 1857 में हुए विद्रोह को ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में पढ़ते आये हैं. लेकिन ख़बरें आ रही हैं कि केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय एक आदेश जारी करके अब 1857 की जगह 1817 के पाइका विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम घोषित करने जा रहा है. इसे अगले सत्र से इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में शामिल किये जाने की सम्भावना है.

पाइका ओड़िशा के गजपति शासकों के तहत कृषक मिलिशया थे जिन्होंने युद्ध के दौरान राजा को अपनी सैन्य सेवा उपलब्ध करायी थी. उन्होंने 1817 में ही बक्सी जगबंधु विद्याधारा के नेतृत्व में ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ बगावत की थी. ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने केंद्र को पत्र लिखकर उससे अपील की थी कि उसे पाइका विद्रोह को ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रुप में मान्यता देना चाहिए क्योंकि यह 1857 के सिपाही विद्रोह से चार दशक पहले हुआ था. फिलहाल 1857 के सिपाही विद्रोह को प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि 1817 में हुए पाइका विद्रोह को अगले सत्र से इतिहास की किताबों में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का स्थान मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि पाइका विद्रोह के 200 पूर्ण होने के अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से 200 करोड़ रुपये समारोह आयोजित करने के लिए भी दिए जायेंगे. इस सम्बन्ध में सरकार की ओर से अधिकारिक आदेश जारी किया जायेगा.

 

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