पप्पू जी का टिफ़िन

पप्पू जी का टिफ़िन

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एक कंस्ट्रक्शन साईट पर एक गुजराती, एक मद्रासी और Pappu साथ में 22वीं मंजिल पर काम कर रहे थे. 

दोपहर के खाने के समय गुजराती अपने टिफ़िन में ढोकला देखकर गुस्सा होकर बोला – “अगर कल टिफ़िन में फिर ढोकला निकला तो मैं यहीं से कूद जाऊँगा…”

मद्रासी ने अपना टिफ़िन खोला और उसमें इडली सांबर देखकर बोला – “मैं भी यहीं से कूद जाऊँगा अगर कल फिर इडली सांबर निकला तो …”

पप्पू ने भी अपने टिफ़िन में परांठा देखकर गुस्सा होते हुए कहा कि कल अगर फिर से परांठा निकला तो मैं भी अपनी जान दे दूंगा. 

अगले दिन फिर से तीनों खाना खाने बैठे. बदकिस्मती से तीनों के टिफिन में फिर से वही चीजें निकलीं. गुस्से में आकर तीनों ने 22वीं मंजिल से छलांग लगा दी और मर गए. 

तीनों की बीवियों को पता चला तो वे रोटी पीटती हुईं वहाँ आईं. 

गुजराती की बीवी रोते रोते बोली – “मैं इतने प्यार से ढोकला बनाती थी … अगर मुझे पता होता कि इन्हें पसंद नहीं है तो मैं कभी न बनाती…”

मद्रासी की बीवी बोली – “अगर ये एक बार भी मना कर देते तो मैं कभी इडली सांबर नहीं बनाती …”

पप्पू की बीवी ने कुछ नहीं कहा तो सब उसकी ओर देखने लगे. 

वो सहमकर बोली – “मेरी तरफ ऐसे मत देखो … पप्पू जी अपना टिफिन खुद बनाते थे…!!!”

 

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