Home प्रेरक कहानियाँ (Motivational Stories) जब तोता निकला मालिक से ज्यादा समझदार

जब तोता निकला मालिक से ज्यादा समझदार

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एक आदमी रोजाना सत्संग में जाता था. उसने अपने घर पर पिंजरे में एक तोता पाला हुआ था.

एक दिन तोते ने पूछा – “मालिक, आप रोजाना नियम से कहाँ जाते हैं ?”

आदमी ने कहा – “सत्संग में ज्ञान की बातें सुनने जाते हैं … वहाँ एक संत हैं जो हमारी हर शंका का समाधान कर देते हैं.”

तोता बोला – “मालिक, कल आप जाएँ तो तो उनसे मेरी तरफ से एक बात पूछ लेना. उनसे पूछना कि मुझे आजादी कब मिलेगी …?”

आदमी को तोते की बात सुनकर हंसी आई फिर भी उसने कहा कि वह जरूर पूछ लेगा.

अगले दिन आदमी सत्संग में गया और उसने संत जी से पूछा – “महाराज मेरे घर में एक तोता है वो पूछता है कि वह आजाद कब होगा …?”

संत जी ने आदमी की बात सुनी तो तुरंत बेहोश होकर गिर पड़े. आदमी घबरा गया कि आखिर उसने ऐसा क्या पूछ लिया जो संत जी बेहोश हो गए. आखिर थोड़ी देर बाद वे होश में आ गए और आदमी अपने घर चला आया.

आदमी घर आया तो तोते ने पूछा कि संत जी ने क्या कहा. आदमी बोला -“अबे कुछ नहीं कहा, उल्टा तेरे प्रश्न में न जाने ऐसा क्या था कि सुनते ही बेचारे बेहोश होकर गिर पड़े….”

तोता बोला – “ठीक है मालिक, मैं समझ गया.”

अगले दिन जब आदमी अपने काम पर जाने के लिए तैयार हुआ तो चलते समय तोते का हाल देखने के लिए पिंजरे के पास आया. तभी अचानक तोते ने पिंजरे में चक्कर लगाया और बेहोश होकर गिर पड़ा.

यह देख आदमी ने पिंजरा खोला और उसे बाहर निकाला. तोता बेसुध पड़ा था. वह घबरा गया और उसे होश में लाने के लिए पानी लाने भीतर की ओर भागा. उसके जाते ही तोता फुर्र से उड़ गया.

शाम को जब आदमी सत्संग में पहुंचा तो संत जी ने पूछा – “कल आपने जिस तोते की बात की थी वो अब कहाँ है ?”

आदमी बोला – “महाराज, वह तो बड़ा नाटकबाज निकला. आज सुबह उसने बेहोश होने का नाटक किया और जब मैंने पिंजरे से निकाला तो फुर्र से उड़ गया …”

संत जी बोले – “वह तोता तुमसे ज्यादा समझदार निकला. तुम रोज रोज सत्संग में आते हो फिर भी कुछ नहीं सीखे, अभी भी सांसारिक मायामोह में बंधे हो. और वह बिना सत्संग में आये ही मेरा इशारा समझ गया और आजाद हो गया.”

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