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पटाखा बैन से मायूस दिल्ली वालों को दिखी आशा की किरण, मोदी जी ने दिया धमाका करने का आश्वासन

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जैसे जैसे दिवाली नजदीक आती जा रही है, दिल्ली वालों की मायूसी बढ़ती जा रही है. सुप्रीम कोर्ट बैन हटाने के मूड में नहीं दिख रहा है और दिल्ली वालों के दिल बैठते जा रहे हैं. कई लोग तो एक शांतिपूर्ण प्रदूषणमुक्त दिवाली की कल्पना से ही सिहर रहे हैं.

हालांकि कई लोग अभी भी ऐसे हैं जिन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है. उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट भले उनकी भावनाओं को न समझे, पर सरकार उनकी दिवाली यूं खामोश नहीं जाने देगी.

ऐसे ही एक आशावादी लोकल नेता, जो टिकट की उम्मीद में पिछले बारह सालों से आमसभाओं में जाजम बिछाने से लेकर उठाने तक की महती जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, से हमारी बात हुई. हमने टटोलते हुए पूछा, ‘भाई इस बार पटाखे बैन हैं, बड़ी खामोश सी लगेगी दिवाली  ?’

नेताजी जोशीली आवाज में बोले, ‘वो जिनको खामोशी पसंद थी, 2014 में ही चले गए. हमारी दिवाली मनेगी और धमाकेदार मनेगी.’

हमने कहा, ‘पटाखे तो बैन हैं, धमाकेदार कैसे होगी ?’

नेताजी ने बताया, ‘मेरी कल ही मोदी जी से बात हुई है. उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों ने उनका दर्द नहीं समझा तो क्या हुआ पर वे दिल्ली वालों का दर्द समझते हैं. चिंता मत करो, मैं अभी दिमाग चला रहा हूँ, कुछ न कुछ जरूर करूंगा. तुम्हारी दिवाली यूं ख़ामोशी से न गुजरने दूंगा.’

हमने कहा, ‘पर भाई, पटाखों पर बैन तो कोर्ट ने लगाया है और मोदी जी उसके खिलाफ नहीं जा सकते….’

नेता जी चिढ़ कर बोले, ‘अबे, तुम पत्रकार लोग कभी मोदी जी को समझ नहीं पाओगे. पटाखों से क्या होता है ? धमाका ही होता है न ? हमारे मोदी जी भी धमाका करते हैं. देखा नहीं, पिछले एक साल में उन्होंने कैसे कैसे जोरदार धमाके किये, पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी… क्या पता, दिवाली की रात को भी कोई ऐसा धमाका कर दें … दिल्ली क्या चीज़ है, पूरा देश दहल जाएगा … समझे ?’

नेताजी की बात और मूड हमें एक झटके में समझ में आ गए और हम चुपचाप अपना झोला उठाकर वहाँ से निकल लिए.

(अस्वीकरण : इस लेख का किसी भी सच्ची घटना से कोई लेना देना नहीं है और विशुद्धरूप से मनोरंजनार्थ लिखा गया है. इसे हास्य व्यंग्य के रूप में ही लिया जाए.)

(By : Sanat Sharma)

 

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