पत्नी का भूत

पत्नी का भूत

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एक आदमी की पत्नी काफी दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रही थी. एक दिन जब वह मरणासन्न स्थिति में पहुँच गई तो वह अपने पति से बोली – “मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ … मैं नहीं चाहती कि मेरे मरने के बाद तुम मुझे भुला दो और दूसरी शादी करो… वचन दो कि मेरे मरने के बाद तुम किसी और से प्रेम नहीं करोगे …वर्ना मेरी आत्मा तुम्हे चैन से जीने नहीं देगी”.

आदमी ने उसका हाथ अपने हाथ में लेकर कहा – “ऐसा ही होगा … मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ”.

और इसके बाद पत्नी चल बसी.

कुछ महीने गुजर गए और आदमी ने अपने वचन को ध्यान में रखते हुए किसी दूसरी महिला की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखा. लेकिन एक दिन उसकी मुलाक़ात एक अत्यंत सुन्दर व नेक लड़की से हुई और धीरे-धीरे दोनों में प्यार हो गया. बात आगे बढ़ी और हिचकते-हिचकते आदमी ने उससे शादी कर ली.

शादी के तुरंत बाद पहली रात को ही आदमी को लगा कि कोई उससे कुछ कह रहा है. मुड़कर देखा तो उसकी पत्नी की आत्मा थी.

आत्मा बोली – “तुमने अपना वचन तोड़ा है. अब मैं तुम्हें चैन से जीने नहीं दूँगी ..”.

और इतना कहकर वह गायब हो गई.

आदमी घबरा गया और सारी रात सो नहीं सका.

अगली रात को भी वही हुआ और आत्मा फिर उसके सामने आकर बोली – “मैं तुम्हारा जीना हराम कर दूँगी … मैं सब जानती हूँ कि तुम अपनी नई पत्नी को लेकर हनीमून मनाने शिमला लेकर जाने वाले हो और उसके लिए नए जेवर बनवाने जा रहे हो !”

और फिर धमकाने वाले अंदाज़ में बोली – “ये मत समझना कि मैं कहीं चली गई हूँ … मैं हर वक़्त तुम्हारा पीछा कर रही हूँ …. आगे – आगे देखो मैं क्या करती हूँ ?”

आदमी सोच में पड़ गया कि जो बातें अभी उसने किसी को नहीं बताईं वो इसे कैसे मालूम चल गईं. वह  डर के मारे थर-थर कांपने लगा.

घबराया हुआ वह शहर से दूर रहने वाले एक पहुंचे हुए महात्मा के पास पहुंचा और पूरी बात उन्हें सुनाई.

महात्मा बोले – “यह आत्मा बहुत चालाक है.”

आदमी – “हाँ गुरूजी, तभी तो उसे मेरी एक-एक बात पता होती है !”

महात्मा – “पर तुम चिंता मत करो. मेरे पास उसका इलाज है. इस बार जब तुम्हारी पत्नी का भूत आये तो मैं जैसा कहता हूँ तुम ठीक वैसा ही करना .”

अगली रात जब पत्नी का भूत आया तो आदमी उससे बोला – “तुम इतनी चालाक हो कि मैं तुमसे कुछ छिपा नहीं सकता … जैसा तुम चाहती हो मैं अपनी पत्नी को छोड़ दूंगा लेकिन उससे पहले मेरी एक शर्त है … तुम्हें मेरे एक प्रश्न का उत्तर देना होगा ! और हाँ, अगर तुम उत्तर न दे पाईं तो तुम्हें हमेशा के लिए मेरा पीछा छोड़ना होगा.”

पत्नी की आत्मा बोली – “मंजूर है … पूछो अपना प्रश्न ?”

इतना सुनते ही आदमी ने झट से जमीन पर पड़े बहुत सारे कंकड़ मुट्ठी में भर लिए और बोला – “बताओ मेरी मुट्ठी में कितने कंकड़ हैं ?”

इतना कहते ही आत्मा झट से गायब हो गई और फिर कभी नजर नहीं आई.

कुछ दिन बाद आदमी महात्मा जी का धन्यवाद करने उनके आश्रम पहुंचा. बोला – “गुरूजी, उस आत्मा से पीछा छुड़ाने के लिए मैं सदैव आपका आभारी रहूँगा. पर एक बात बताइये कि उस प्रश्न में ऐसा क्या था कि आत्मा एकदम से गायब हो गई और फिर लौटकर नहीं आई ?”

महात्मा बोले – “बेटा, दरअसल कोई भूत या आत्मा थी ही नहीं …”

आदमी आश्चर्य से बोला – “मतलब ?”

महात्मा बोले – “हाँ , कोई भूत था ही नही , दरअसल दूसरी शादी करने की वजह से तुम्हे एक अपराधबोध महसूस हो रहा था और उसी वजह से तुम्हारा दिमाग एक भ्रम की स्थिति पैदा कर तुम्हे भूत का अनुभव करा रहा था .”

“ पर ऐसा था तो वो मेरी हर एक बात कैसे जान जाता था ?”, आदमी ने पुछा .

महात्मा मुस्कुराये , “ क्योंकि वो तुम्हारा बनाया हुआ ही भूत था ,इसलिए जो कुछ तुम जानते थे वही वो भी जानता था . और यही कारण था कि मैंने तुम्हे वो कंकड़ वाला प्रश्न पूछने को कहा , क्योंकि मैं जानता था कि इसका उत्तर तुम्हे भी नहीं पता होगा और इसलिए भूत भी इसका उत्तर नहीं दे पायेगा और तुम्हे तुम्हारे दिमाग की ही उपज से छुटकारा मिल जायेगा ”

आदमी अब पूरी बात समझ चुका था . उसने एक बार फिर महात्मा को धन्यवाद दिया और अपने घर लौट गया .

 

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