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उसका काम था फोटो खींचना पर जब उसने लोगों को मरते देखा तो कैमरा फेंक दिया और मदद करने भागा

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प्रोफेशनलिज्म कई बार इंसान को निर्मम बना देती है. फोटोग्राफरों पर अक्सर ये आरोप लगाया जाता है कि वे जरूरत के वक़्त मुसीबत में फँसे हुए इंसान की मदद नहीं करते बल्कि फोटो खींचने में लगे रहते हैं. बीते कुछ सालों में ऐसी कई तस्वीरें वायरल हुईं जिनके बारे में कहा गया कि इस मौके पर फोटोग्राफर को तस्वीर खींचने के बजाय मदद करनी चाहिए थी.

बहरहाल, सीरिया में एक फोटोग्राफर ने इंसानियत को प्रोफेशनलिज्म से ऊपर रखा और इन्टरनेट ने उसे हीरो बना दिया.

सीरिया में बचे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर ले जा रहीं बसों के एक काफिले पर बम से हमला हुआ जिसमें 126 लोगों की जानें चलीं गईं. घायलों और मरने वालों में कई मासूम बच्चे भी थे.

इस हादसे को कवर करने पहुंचे एक फोटोग्राफर Abd Alkader Habak ने जब वहाँ का माहौल देखा तो उनसे फोटो नहीं खींचे गए. उन्होंने कैमरा रख दिया और बच्चों की मदद करने को दौड़ पड़े.

Habak ने लाशों के ढेर से जिस पहले बच्चे को उठाया, वह मर चुका था. यह देखकर Habak खुद को रोक नहीं सके और उनकी रुलाई फूट पड़ी.

पास में ही एक दूसरा बच्चा था जिसकी साँसें भी लगभग थम चुकी थीं. कोई चिल्लाया, “उसे मत उठाओ, वो मर चुका है”, पर Habak को लगा कि जैसे अभी उसमें जान बाकी है. उन्होंने बच्चे को उठाया और बेतहाशा एम्बुलेंस की ओर दौड़ पड़े. बच्चा बच सका या नहीं, इसकी कोई खबर नहीं है .

Habak के साथी फोटोग्राफरों ने भी Habak को देखकर फोटो खींचना छोड़ लोगों की मदद करनी शुरू कर दी. लेकिन फिर बाद में उन लोगों ने तस्वीरें लेनी शुरू कर दीं. साथी फोटोग्राफर ने कहा, “मैं वापस कैमरे पर आ गया क्योंकि मुझे पता था कि वहाँ कोई है (Habak) जो लोगों की मदद कर रहा है. हमारे लिए इस घटना के तथ्य सुरक्षित रखना भी जरूरी था.”

Habak के साथी फोटोग्राफर द्वारा खींची गई ये तस्वीरें जब सोशल मीडिया में आईं तो वायरल हो गईं. और हों भी क्यों न ? संसार में मानवता दिखाना ही वह सबसे बड़ा काम है जिसे वायरल होना ही चाहिए.

Habak को सलाम !


(News : CNN)

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