बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार, जिसे लडकियां अपने खून से ख़त लिखा करती...

बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार, जिसे लडकियां अपने खून से ख़त लिखा करती थीं

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आज ही के दिन यानी 18 जुलाई 2012 को हिंदी सिनेमा का वह कलाकार, जिसे बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार कहा गया, इस दुनिया को छोड़कर चला गया था. जी हाँ, हम राजेश खन्ना की बात कर रहे हैं.
सही मायनों में यदि देखा जाए तो बॉलीवुड में ‘सुपरस्टार’ शब्द ही राजेश खन्ना के कारण गढ़ा गया. इससे पहले लोकप्रिय अभिनेता हुआ करते थे, कोई ज्यादा लोकप्रिय, तो कोई कम, लेकिन सुपरस्टार शब्द पहली बार हिंदी सिनेमा में राजेश खन्ना के लिए ही इस्तेमाल हुआ.

फिल्मों में पदार्पण के मात्र तीन साल के भीतर उनकी लोकप्रियता कुछ इस तरह फैली थी जैसे जंगल में आग फैलती है. उनके लिए सुपरस्टार से कम कुछ भी कहा जाता तो यह उनके साथ अन्याय होता.

29 दिसम्बर 1942 को जन्मे राजेश खन्ना का असली जतिन खन्ना था. फिल्मों में प्रवेश के समय उनका नाम उनके अंकल के सुझाव पर राजेश रख दिया गया. उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि लड़का पैदा होने पर हर माँ बाप उसका नाम राजेश रखना चाहते थे.
आइये जानते हैं राजेश खन्ना की ज़िन्दगी की कुछ अनसुनी बातें ….
फिल्म इंडस्ट्री में राजेश को प्यार से काका कहा जाता था। जब वे सुपरस्टार थे तब एक कहावत बड़ी मशहूर थी- ऊपर आका और नीचे काका.

राजेश खन्ना की अदाओं ने उस दौर की लड़कियों के दिलों ऐसा जादू किया था कि कई तो उन्हें अपने खून से ख़त लिखा करती थीं. कईयों ने उनका नाम अपने शरीर पर गुदवा रखा था तो कई उनका फोटो तकिये के नीचे रख कर सोती थीं.
फ़िल्मी गलियारों में मशहूर है कि जब भी किसी निर्माता के घर या स्टूडियो के बाहर राजेश खन्ना की कार खड़ी होती थी तो सफ़ेद रंग की कार को लडकियां चूम चूम कर गुलाबी कर देती थीं.
आपको शायद पता न हो पर 1966 में उन्होंने फिल्म ‘आखिरी ख़त’ से शुरुआत की थी और उनकी ये पहली ही फिल्म भारत की ओर से 1967 में विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म केटेगरी में ऑस्कर के लिए भेजी गई थी.

‘आनंद’ उनके कैरियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानी जाती है हालांकि ‘आराधना’, ‘सच्चा झूठा’, ‘कटी पतंग’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘महबूब की मेहंदी’, ‘आन मिलो सजना’, ‘आपकी कसम’ जैसी फिल्मों ने कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए. उन्होंने तीन बार फिल्मफेयर अवार्ड भी जीता.
राजेश खन्ना ने अपने से उम्र में काफी छोटीं डिंपल कपाडिया से शादी की लेकिन उनका वैवाहिक जीवन सफल नहीं कहा जा सकता क्योंकि बाद में डिंपल और उनमें अलगाव हो गया. ट्विंकल और रिंकी खन्ना उनकी दो बेटियाँ हैं जिनमें से ट्विंकल आज के सुपरस्टार अक्षयकुमार की पत्नी हैं.
राजीव गाँधी के कहने पर राजेश खन्ना ने राजनीति में भी हाथ आजमाया और कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव में भाग लिया. राजनीति में उन्होंने जीत और हार दोनों देखीं लेकिन बाद में इससे उनका मोहभंग हो गया.
थिएटर के दिनों में राजेश खन्ना (तब वे जतिन खन्ना हुआ करते थे) की दोस्ती रवि कपूर से हुआ करती थी. रवि कपूर को फिल्मों में पहले ब्रेक मिला और उन्होंने अपना फ़िल्मी नाम रखा, जीतेन्द्र. दिलचस्प बात ये हैं कि ये नाम जतिन ने अपने लिए सोच रखा था लेकिन रवि के जीतेन्द्र बन जाने से वे राजेश बन गए.
राजेश खन्ना का अफेयर अंजू महेन्द्रू के साथ था और पूरी फ़िल्मी दुनिया इस बात को जानती थी. सब सोचते थे कि एक दिन इनकी शादी हो जायेगी पर एक दिन राजेश खन्ना ने सबको चौंकाते हुए डिंपल कपाडिया को प्रपोज कर दिया और शादी रचा ली. कहते हैं शादी के दिन राजेश खन्ना जान बूझ कर अंजू महेन्द्रू के दरवाजे से होकर अपनी बारात लेकर गए थे.
कहते हैं सफलता के शिखर पर चढ़ना मुश्किल है और उस पर टिके रहना और भी मुश्किल. राजेश खन्ना ने सफलता का शिखर तो छुआ पर वे वहां लम्बे समय तक टिक नहीं सके. हालांकि उनकी दूसरी पारी में भी ‘अवतार’ जैसी कुछ सुपरहिट फ़िल्में दर्ज है लेकिन सफलता की वह कहानी दोहराई न जा सकी जो उन्होंने अपनी जवानी में लिखी थी.
18 जुलाई 2012 को हिंदी सिनेमा का ये सुपर सितारा हमेशा के लिए अस्त हो गया.

 

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