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जानिए कौन है रणजीत सिंह – पहले सुपरस्टार क्रिकेटर, जो महाराजा भी थे जिन्होंने पहले मैच में बनाए थे कई रिकॉर्ड्स

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भारत में लोगों के बीच क्रिकेट का एक अलग ही  जुनून सवार  रहता है और हर कोई इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात जानता ही है। भारत में यूं तो राष्ट्रीय स्तर पर कई क्रिकेट टूर्नामेंट्स का आयोजन किया जाता है आईपीएल टी-20 और बाकी सारे टूर्नामेंट, लेकिन इनमें सबसे प्रमुख है रणजी ट्रॉफी। इनमें खेलकर ही भारत की टीम में कई प्रतिभाशाली क्रिकेटर शामिल हो पाएं हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यह रणजी ट्रॉफी किसके नाम पर होती है या इसे दूसरे शब्दों में कहें तो आखिर इस रणजी ट्रॉफी के नाम के पीछे क्या कहानी है। नहीं जानते तो कोई बात नहीं, हम आज आपको बताएंगे कि आखिर किसके नाम पर इस ट्रॉफी का नाम पड़ा और आखिर क्यों।

रणजी ट्रॉफी का नाम भारतीय क्रिकेट के पहले सुपरस्टार खिलाड़ी रणजीत सिंह  के नाम पर पड़ा जो नवानगर के महाराजा भी थे    । रणजीत सिंह जी को भारतीय क्रिकेट का जन्मदाता माना जाता है। आपको बता दें कि आज यानी 2 अप्रैल को रणजीत सिंह जी की पुण्यतिथि भी है। भारतीय क्रिकेट के इस पहले सुपरस्टार खिलाड़ी का जन्म 10 सितंबर 1872 को गुजरात के नवानगर में हुआ था। इनके जन्म के पांच साल बाद ही इंग्लैंड में 1877 में टेस्ट क्रिकेट शुरू हुआ। उस दौरान इस खेल पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का ही दबदबा था। भारत में इसका कोई विस्तार भी नहीं हुआ था और किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि भारत में जन्मे किसी खिलाड़ी को उस समय इंग्लैंड की टीम में शामिल होने का मौका भी मिल पाएगा।

फिर कैसे एक खिलाडी जो टेनिस खेलता था और वो बन गया इंडियन क्रिकेट का जन्मदाता-

बचपन में रणजीत सिंह की क्रिकेट में किसी तरह की कोई रुचि नहीं थी। वे एक टेनिस खिलाड़ी बनना चाहते थे, लेकिन जब वे पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए तो उस समय वहां टेनिस से ज्यादा क्रिकेट खेला जा रहा था। इंग्लैंड में क्रिकेट के प्रति लोगों का प्यार देखकर उनका भी इस खेल के लिए प्यार बढ़ता गया। रणजीत सिंह ने भी क्रिकेट खिलाड़ी बनने का फैसला किया और ग्रेजुएशन के बाद इंग्लैंड के ससेक्स क्लब के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया। इस क्लब की ओर से खेलते हुए उन्होंने काफी अच्छा प्रदर्शन किया।

ससेक्स क्रिकेट क्लब के लिए चार साल तक की कप्तानी  –

रणजीत सिंह ने ससेक्स क्रिकेट क्लब के लिए चार साल तक कप्तानी भी की। वे भारत के पहले क्रिकेट खिलाड़ी थे, जिसने इंग्लैंड की तरफ से अपना क्रिकेट करियर शुरू किया। उस समय भारत में अंग्रेजों का ही शासन था और रणजीत सिंह जी का चयन इंग्लैंड टीम में हुआ था। हालांकि, 1896 में उनके चयन को लेकर विवाद भी हुआ। लॉर्ड हारिस ने उनके चयन पर यह कहते हुए आपत्ति उठाई कि उनका जन्म इंग्लैंड में नहीं बल्कि भारत में हुआ है, तो टीम में उन्हें कैसे शामिल किया जा सकता है। इससे पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रणजीत सिंह ने 307 प्रथम श्रेणी मैच खेलते हुए तकरीबन 56 की औसत से 24692 रन बनाए, जिसमें 72 शतक और 109 अर्धशतक शामिल हैं।

रणजीत सिंह ने अपने पहले ही मैच में बना डाले कई रिकॉर्ड्स –

मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में रणजीत सिंह को खेलने का मौका मिला और पहले ही अंतरराष्ट्रीय मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई रिकॉर्ड्स बना डाले। रणजीत सिंह ने इस मैच की दूसरी पारी में तेज खेलते हुए 23 चौके की मदद से नॉट आउट रहते हुए 154 रन बनाए थे। इसके साथ ही रणजीत पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफोर्ड मैदान पर 150 रन से ज्यादा बनाए।

भारत मेंरणजीत सिंह के नाम से शुरू हुई  रणजी ट्रॉफी 

रणजीत सिंह ने अपने क्रिकेट करियर का पहला और आखिरी दोनों ही मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफोर्ड मैदान पर ही खेला जो उनके जीवन की खास बात रही । आखिरी मैच में रणजीत कुछ खास नहीं कर पाए थे और  इस मैच में रणजीत कुल मिलाकर सिर्फ छह रन बना पाए थे। 1904 में रणजीत भारत वापस आ गए। रणजीत का क्रिकेट के प्रति इतना प्यार था कि 48 साल के उम्र में वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना चाहते थे। 1907 में रणजीत सिंह नवानगर के महाराजा बने। एक अच्छे क्रिकेटर की तरह वे एक अच्छे प्रशासक भी साबित हुए। 1934 में रणजीत सिंह जी के नाम पर भारत में रणजी ट्रॉफी की शुरुआत हुई। रणजीत भारत के ऐसे पहले क्रिकेट खिलाड़ी थे, जिन्हें अंतराष्ट्रीय मैचों में मौक़ा मिला था|

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