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6 परेशानियां, जो बताती हैं कि भारत में समलैंगिक विवाह को कभी मान्यता नहीं मिल सकती

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दुनिया के दूसरे देशों में धीरे-धीरे समलैंगिक विवाह को मान्यता मिलने लगी है, किन्तु भारत में इसे मान्यता मिलना असंभव है क्योंकि यहाँ जिस तरह से शादियाँ संपन्न होती हैं उस तरह से समलैंगिक विवाह रचाने पर तमाम व्यावहारिक समस्याएं खड़ीं हो जायेंगी.

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Image : madright.com

उदाहरण के लिए –

  1. बारात लेकर कौन जाएगा और विदा होकर कौन आएगा ?
  2. शादी के कार्ड में चिरंजीव किसे लिखा जाएगा और सौ.का. किसे ?
  3. सगाई के बाद कौन किसके मोबाइल में रिचार्ज करवाएगा ?
  4. हमारे यहाँ शादियों में सबसे महत्त्वपूर्ण रस्म होती है – कन्यादान ! तो इसमें कौन कन्या दान करेगा और कौन ग्रहण करेगा  ?
  5. किस पक्ष की लड़कियों को सालियाँ माना जाएगा ताकि वो दूसरे पक्ष के लड़कों के जूते चुरा सकें ?
  6. दहेज़ लेकर जाया जाएगा या दहेज़ लेकर आया जाएगा ?

इस तरह की और भी अनेक  समस्याएं हो सकतीं हैं अतः भारत में समलैंगिक विवाह को मान्यता मिलना असंभव है.

 

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