सबसे अच्छी बात (प्रेरक प्रसंग)

सबसे अच्छी बात (प्रेरक प्रसंग)

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रॉबर्ट डि विन्सेंजों अर्जेंटीना के महान गोल्फ खिलाड़ी थे. वे जितने अच्छे खिलाड़ी थे उतने ही अच्छे इंसान भी थे. जरूरतमंदों की मदद करने में वे कभी पीछे नहीं रहते थे.

एक बार एक महत्वपूर्ण गोल्फ टूर्नामेंट में जीत जाने के बाद रॉबर्ट डि विन्सेंजों अपनी गाड़ी लेने के लिए पार्किंग लॉट में जा रहे थे.

अभी वे अपनी गाडी के पास पहुंचे ही थे कि एक युवती उनके पास आई और उन्हें जीत की बधाई देने लगी. इसके बाद उसने बताया कि उसके बच्चे को कैंसर है तथा वह मृत्यु के करीब है, और उसके पास अस्पताल का बिल चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं. यदि रॉबर्ट उसकी कुछ मदद कर सकें तो वह उनकी आभारी रहेगी.

बच्चे को कैंसर की बात सुनकर रॉबर्ट को बहुत दुःख हुआ. उन्होंने तुरंत उस दिन जीती हुई रकम का एक बड़ा हिस्सा युवती को दे दिया. युवती उनका धन्यवाद करती हुई चली गई.

लगभग एक सप्ताह बाद प्रोफ़ेशनल गोल्फ असोसिएशन के लंच पर उन्होंने अपने मित्रों को ये बात बताई. मित्रों में एक ने रॉबर्ट से पूछा, “क्या उस युवती के बाल सुनहरे थे और उसकी एक आंख के नीचे दाग था”?

रॉबर्ट के ‘हां’ कहने पर मित्र ने कहा, “उसने तुम्हें ठग लिया. वो औरत यही कहानी सुनाकर यहां आनेवाले बहुत से विदेशी गोल्फ़र्स को ठग चुकी है”.

“तो, तुम्हारे कहने का मतलब है कि उसके बच्चे को कैंसर नहीं है”?, रॉबर्ट ने पूछा.

“नहीं. ये सारी उस युवती की मनगढंत कहानी है”.

“वाह, फिर तो ये इस सप्ताह की सबसे अच्छी बात है”, रॉबर्ट ने राहत की सांस लेते हुए कहा.

 

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