रौब रुतबा किसका ?

रौब रुतबा किसका ?

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एक बार एक कलेक्टर, एक एसपी, एक मिनिस्टर और एक टीचर ट्रेन के एक ही कम्पार्टमेंट में यात्रा कर रहे थे. बैठे – बैठे बातें होने लगीं.
कलेक्टर साहब बोले – “हम तो अपने इलाके के मालिक होते हैं … हमारा हुक्म टालने की हिम्मत किसी में नहीं होती !”
एसपी साहेब बोले – “इलाके के असली शेर तो हम हैं भाई … जिसे जब चाहें उठवा लें !”
मिनिस्टर साहब बोले – “अमां छोडो यार ! हमारे रुतबे के आगे सब फीके हैं … हम अपने इलाके में जो चाहें करे कोई कुछ बोल नहीं सकता !”
सबकी सुनने के बाद टीचर महोदय बोले – “हमारा तो कोई भी रौब रुतबा नहीं होता है जी …. हम तो सारे दिन बच्चों को मुर्गा बना कर कूटते हैं … आगे सालों की मर्जी … कलेक्टर बनें, एसपी बनें या मिनिस्टर बनें !!!”

 

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