सनकी राजा और बुद्धिमान मंत्री

सनकी राजा और बुद्धिमान मंत्री

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सैकड़ों वर्ष पहले एक नदी के किनारे एक सुन्दर नगरी बसी हुई थी. किन्तु उस नगरी का राजा बड़ा ही मूर्ख और सनकी था. एक दिन राजा अपने मंत्री के साथ महल की छत पर टहलता हुआ नदी को निहार रहा था कि तभी अचानक उसके दिमाग में एक विचार आया और उसने मंत्री से पूछा – “मंत्री जी, ये बताइये कि यह नदी किस दिशा में और कहाँ तक बहकर जाती है ?”
मंत्री बोला – “महाराज, यह नदी पूरब दिशा की ओर बहती है और कई राज्यों से होते हुए समुद्र में मिल जाती है.”
राजा – “तो क्या उन राज्यों के लोग भी इस नदी के पानी का उपयोग करते हैं ?”
“अवश्य करते होंगे महाराज”, मंत्री ने उत्तर दिया.
यह सुनते ही राजा को सनक सवार हो गई. वह मंत्री को आदेश देते हुए बोला – “जाओ फ़ौरन नदी में दीवार खड़ी करवा कर पानी रोक दो. ये नदी हमारी है और हम किसी को मुफ्त में इसका पानी उपयोग नहीं करने देंगे !”
मंत्री राजा के सनकी स्वभाव से भलीभांति परिचित था इसलिए उसने उस वक़्त कोई भी समझाइश देना उचित नहीं समझा और फ़ौरन जाकर नदी में दीवार खड़ी करवाने में जुट गया.
कुछ ही दिनों में दीवार खड़ी हो गई जिसे देखकर राजा बहुत खुश हुआ. लेकिन कुछ ही समय बाद नदी का पानी नगर में घुसने लगा जिससे प्रजा त्राहि-त्राहि करने लगी.
प्रजाजन भी राजा से बहुत डरते थे इसलिए वे अपनी परेशानी लेकर मंत्री के घर गुहार लगाने पहुँच गए. मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह सब कुछ ठीक कर देगा.
उस जमाने में आज की तरह घड़ियों का प्रचलन नहीं था इसलिए समय की जानकारी देने के लिए महल में एक घंटा बजाने वाला रखा जाता था जो एक नियत अंतराल पर घंटा बजाकर समय की सूचना देता था.
मंत्री ने घंटा बजाने वाले को आदेश दिया कि आज की रात वह जितना समय हो उससे दोगुना घंटा बजाये. उसने ऐसा ही किया और रात के तीन बजे ही 6 बार घंटा बजा दिया जिसका अर्थ था कि सुबह के 6 बज गए हैं.
घंटे की आवाज सुनकर सभी लोग उठ खड़े हुए. राजा भी उठकर बाहर आ गया. मंत्री वहाँ पहले से मौजूद था.
चारों ओर घनघोर अँधेरा देखकर राजा ने मंत्री से पूछा – “मंत्री जी, 6 बज गए लेकिन अभी तक सुबह नहीं हुई … सूरज क्यों नहीं निकला ?”
मंत्री सिर झुककर बोला – “महाराज सुबह तो हो चुकी है लेकिन सूरज अब शायद कभी भी नहीं निकलेगा …”
राजा ने हैरानी से पूछा – “क्यों नहीं निकलेगा सूरज ?”
मंत्री बोला – “महाराज, सूरज पूरब से निकलता है और हमने पूरब दिशा वालों का पानी रोक दिया है इसलिए उन्होंने सूरज को रोक लिया है…”
यह सुनते ही राजा चिंता में पड़ गया और बोला – “तो क्या अब हम लोग हमेशा अन्धकार में ही रहेंगे ? इसका कोई उपाय नहीं है क्या ?”
मंत्री बोला – “महाराज, अगर हम उनका पानी छोड़ दें तो शायद वो भी सूरज को छोड़ देंगे.”
अँधेरे से घबराए राजा ने मंत्री को आदेश दिया कि नदी पर बनी दीवार फ़ौरन तोड़ दी जाए. इतना सुनते ही मंत्री संपूर्ण प्रजाजनों को लेकर फ़ौरन दीवार तोड़ने निकल पड़ा.
जब तक दीवार टूटी, तब तक सूरज के निकलने का समय भी हो गया. सूरज को उगता देख राजा बहुत खुश हुआ और उसने मंत्री को तमाम शाबाशी और इनाम दिया.

 

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