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जब लोग 2 सितम्बर को सोये थे और जागे थे 14 सितम्बर को

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सितम्बर के महीने में कितने दिन होते हैं ? आप कहेंगे 30, और बिलकुल सही हैं. लेकिन यदि हम आपसे कहें कि इतिहास में एक सितम्बर ऐसा भी हुआ था जिसमें से पूरे 11 दिन गायब हो गए थे तो आप विश्वास नहीं करेंगे. पर ये बिलकुल सच है.

यदि आप गूगल में सितम्बर 1752 का कैलेंडर सर्च करेंगे तो पायेंगे कि उसमें 2 तारीख के बाद सीधी 14 तारीख आती है. आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं. ये 11 दिन न तो फोटोशॉप के जरिये मिटाए गए हैं और न ही इसमें कोई गड़बड़ है. सितम्बर 1752 में सचमुच 11 दिन कम थे. अब आपके दिमाग में प्रश्न उठ रहा होगा कि यह कैसे संभव है ? चलिए बताते हैं.

दरअसल सितम्बर 1752 तक ब्रिटेन में रोमन जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था. रोमन जूलियन कैलेंडर रोमनों द्वारा बनाया गया कैलेंडर है जो सैकड़ों वर्षों तक यूरोप और रोमनों के अधीन आने वाले देशों में काल की गणना का जरिया बना रहा.

बाद में (1582 में) एक अधिक प्रमाणिक कैलेंडर अस्तित्व में आया जिसे ग्रेगोरियन कैलेंडर के नाम से जानते हैं. तो सितम्बर 1752 वह महीना था जब ब्रिटेन ने जूलियन कैलेंडर से ग्रेगोरीयन कैलेंडर में शिफ्ट किया था. ग्रेगोरियन कैलेंडर पोप ग्रेगोरी XIII द्वारा ईजाद किया गया था जो तारीखों की गणना के लिए अधिक उपयुक्त समझा गया था.

अब ब्रिटेन के किंग ने जूलियन से ग्रेगोरियन कैलेंडर में शिफ्ट होने का आदेश तो दे दिया लेकिन दोनों के बीच 11 तारीखों का अंतर था. तो अंतर पाटने के लिए राजा ने आदेश दिया कि इन 11 दिनों को विलुप्त कर दिया जाए. कहने का मतलब 2 तारीख के बाद सीधी 14 तारीख आई.

कर्मचारियों के मजे हो गए क्योंकि उन्होंने 11 दिन कम काम किया और तनख्वाह पूरे महीने की पाई. लेकिन कुछ दिनों बाद एक और समस्या खड़ी हो गई. दरअसल रोमन जूलियन कैलेंडर के अनुसार नया वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता था और लोगों को वही आदत पड़ी हुई थी. जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर में नया वर्ष जनवरी से शुरू होता था.

तो लोगों ने आधिकारिक तौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर को मान तो लिया लेकिन 1 अप्रैल को नया साल मनाना नहीं छोड़ा. आखिरकार किंग ने एक और आदेश जारी किया, ‘जो भी 1 अप्रैल को नया वर्ष मनाये उसे मूर्ख (fool) माना जाए.’ और इस तरह से 1 अप्रैल को फूल्स डे के रूप में मनाने की प्रथा शुरू हो गई.

(दोनों कैलेंडरों के बीच मुख्य भेद यह है कि जूलियन कैलेंडर के अनुसार एक साल 365.25 दिन का माना जाता है जबकि वास्तविकता में यह 11 मिनट छोटा होता है. 11 मिनट का यह अंतर पाटने के लिए जूलियन कैलेंडर को हर 129 साल बाद 1 दिन आगे बढ़ा दिया जाता है. लेकिन इससे त्यौहारों और ऋतुओं से जुड़े दिनों की सही तारीख कि गणना में कठिनाई होने लगी. नतीजतन पोप ग्रेगोरी ने नया कैलेंडर बनाया जो आज लगभग पूरी दुनिया में चलता है. )

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