नौकर और आम (Funny Story)

नौकर और आम (Funny Story)

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दक्षिण भारत के एक छोटे से शहर में एक धनी आदमी रहता था. एक दिन वह बाज़ार से दो बड़े और मीठे आम लेकर आया और अपने नौकर को देते हुए बोला – “रामू, ये आम किचन में ले जाओ और प्लेट में काट कर रखो. अभी थोड़ी देर में मेरा  दोस्त मुझसे मिलने आने वाला है, तब ले आना.”
रामू दोनों आम लेकर किचन में गया और उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर प्लेट में रखने लगा. अचानक उसके मन में आया कि देखूँ तो कहीं ये आम खट्टे तो नहीं हैं, और ये सोचकर उसने एक टुकड़ा अपने मुँह में डाल लिया.
आम इतना मीठा और स्वादिष्ट था, कि उसका जी ललचा गया. उसने सोचा कि अगर मैं एक टुकड़ा और खा लूँ तो मालिक को क्या पता चलेगा. और उसने एक टुकड़ा और मुँह में डाल लिया.
आम था ही इतना जायकेदार कि रामू का लालच बढ़ता गया और एक-एक टुकड़ा करके वह दोनों आम खा गया. उसकी तन्द्रा तब भंग हुई जब बैठक से मालिक ने आवाज लगाईं – “रामू, आम कटे या नहीं ? दो कप कॉफ़ी और तैयार रखना. मेरा दोस्त बस आने ही वाला है…”
बेचारा रामू ! वह तो दोनों आम खा चुका था. अब क्या करे ? उसने तेज़ी से सोचना शुरू किया और किचन में से ही बोला – “मालिक, ये चाक़ू की धार खराब हो गई है … आम कट ही नहीं रहे !”
“मूर्ख, तब से नहीं बता सकता था कि चाक़ू की धार खराब है … “, मालिक चिल्लाया, “जल्दी से चाक़ू मेरे पास लेकर आ, मैं उसकी धार तेज़ करता हूँ तब तक तू कॉफ़ी तैयार कर…”
रामू ने झट से किचन में से एक बड़ा सा, भोंथरा चाक़ू उठाया और दौड़कर मालिक को दे आया. मालिक गुस्से में बडबडाते हुए उसे पत्थर पर घिसने लगा.
जैसे ही मालिक चाक़ू घिसने में व्यस्त हुआ, रामू चुपके से घर से बाहर निकला और उस रास्ते की ओर दौड़ लिया जिधर से मालिक का दोस्त आने वाला था. वह सामने ही आता हुआ दिख गया.
रामू दौड़कर उसके पास पहुंचा और बोला – “श्रीमान रुकिए, मुझे आपसे कुछ पूछना है !”
दोस्त रुक गया तो रामू उसके पास पहुँच कर बोला – “क्या आपके मेरे मालिक के साथ कोई झगडा हुआ है ? वो कह रहे थे कि आज आपके दोनों कान काट लेंगे …!”
“क्या बकवास कर रहा है ?”, दोस्त बोला, “मेरा भला उससे क्यों झगडा होगा ? वो तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है !”
“याद कीजिये श्रीमान, क्योंकि उन्होंने खुद मुझ से कहा है कि आज आपके कान काट लेंगे … इसके लिए वो तो बड़ा सा चाक़ू भी तैयार करने में लगे हुए हैं !”, रामू ने बात को जमाते हुए कहा.
“अरे भाई, कल मैंने ये जरूर कह दिया था कि ये कुरता तेरे ऊपर अच्छा नहीं लगता और ये बात उसे थोड़ी बुरी भी लगी थी, पर इतनी सी बात पर कोई किसी के कान काटता है क्या ? मुझे विश्वास नहीं होता …”, दोस्त असमंजस से बोला.
“विश्वास नहीं होता तो चलकर अपनी आँखों से देख लीजिये, लेकिन खिड़की से झाँक कर देखना … और ये भी ध्यान रखना कि वो आपको पकड़ न पायें, क्योंकि वो बहुत गुस्से में हैं !”
इतना कहकर रामू मालिक के दोस्त को खिड़की के पास ले गया. अन्दर मालिक बडबडाता हुआ चाक़ू की धार तेज़ करने में लगा हुआ था. अब दोस्त को विश्वास हो गया कि रामू जो कुछ कह रहा है वो सच है.
तभी मालिक ने दोस्त को देख लिया और खड़े होते हुए बोला – “अरे तू आ गया, आ जा अन्दर आ जा …”
जैसे ही मालिक खड़ा हुआ, दोस्त उलटे पाँव भागा. उसके भागते ही रामू दौड़कर मालिक के पास बैठक में आया और बोला – “मालिक, मालिक ! आपका दोस्त दोनों आम लेकर भाग गया … !”
मालिक ने बाहर निकल कर देखा कि उसका दोस्त भाग रहा है. वह भी हाथ में चाक़ू लिए पीछे-पीछे दौड़ता हुआ चिल्लाया – “अरे रुक जाओ … रुको …. “
दोस्त ने उसे चाक़ू लेकर पीछे दौड़ते हुए देखा तो वह डबल स्पीड से भागने लगा और सीधे अपने घर जाकर ही रुका.
मालिक ने थोड़ी दूर तक पीछा किया फिर निराश होकर वापस लौट आया. उसका आम खाने का बहुत मन था. वह फिर बाज़ार गया, दो आम लाया और रामू को देते हुए बोला – “अब इन्हें काटो, हम तुम दोनों मिलकर खायेंगे …”

 

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