Follow gustakhimaaf on Twitter

शेरो-शायरी



किस-किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया
गैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया
- शहरयार





मैनोशी के आदाब से आगाह नहीं है तू
जिस तरह कहे साकी-ए-मैखाना पिए जा
- अख्तर शीरानी





मैं नजर से पी रहा हूं, ये समां बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें, कही रात ढल न जाए
- अनवर मिर्जापुरी





पहलू से दिल को लेके वो कहते हैं नाज से
क्या आएं घर में आप ही जब मेहरबां न हों
- मौलाना मुहम्मद अली जौहर





[First Page] [Prev] 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 [Next] [Last Page]