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शेरो-शायरी



तुम भी मजबूर हो हम भी मजबूर हैं
बे-वफा कौन है, बा-वफा कौन है
- बशीर बद्र




पी शौक से वाइज अरे क्या बात है डर की
दोजख तिरे कब्जे में है जन्नत तेरे घर की
- शकील




मैं मैकदे की राह से होकर गुजर गया
वरना सफर हयात का काफी तबील था
- अब्दुल हमीद ''अदम''




कुछ सागरों में जहर है कुछ में शराब है
ये मसअला है तश्नगी किससे बुझाई जाय
- शहरयार ''अखलाक''




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