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शेरो-शायरी



दुख्तरे-रज ने उठा रक्खी है आफत सर पर
खैरियत गुजरी कि अंगूर के बेटा न हुआ
- अकबर इलाहाबादी




रिन्दे-खराब-हाल को जाहिद न छेड़ तू
तुझको पराई क्या पड़ी अपनी निबेड़ तू
- जौक




उस शख्स पर शराब का पीना हराम है
जो रहके मैकदे में भी इन्सां न हो सका
- पारसा कौसरी




इतनी पी है कि बाद तौबा भी
बे पिए, बेखुदी सी रहती है
- रियाज खैराबादी




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