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शेरो-शायरी



जाम जब पीता हूं मुंह से कहता हूं बिस्मिल्लाह
कौन कहता है कि रिन्दों को खुदा याद नहीं
- इकबाल सफीपुरी




साकिया तिश्नगी की ताब नहीं
जहर दे दे अगर शराब नहीं
- अज्ञात




देखना-देखना ये हजरते-वाइज ही न हों
रास्ता पूछ रहा है कोई मैखाने का
- शकील




छलक के कम न हो ऐसी कोई शराब नहीं
निगाहे-नर्गिसे-राना तेरा जवाब नहीं
- फिराक




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