शेर का बाल

शेर का बाल

0
SHARE

बहुत समय पहले की बात है. एक सैनिक ने एक भीषण युद्ध में हिस्सा लिया. कई महीनों तक चले युद्ध में हुई भीषण मारकाट ने सैनिक के दिमाग पर गहरा असर डाला और उसके व्यवहार को बिलकुल परिवर्तित कर दिया. युद्ध की समाप्ति पर जब वह घर लौटा तो वह भयंकर क्रोधी और चिडचिडा हो चुका था. वह अपनी पत्नी और बच्चों पर बात-बात में आगबबूला हो उठता. पूरा परिवार उसके व्यवहार से डरा सहमा सा रहने लगा.

पति की ऐसी हालत देखकर उसकी पत्नी लक्ष्मी को बहुत चिंता रहने लगी. किसी ने उसे एक अच्छे वैद्य के बारे में बताया और उसके पति का इलाज उनके पास कराने के लिए समझाया. एक दिन लक्ष्मी उस वैद्य के पास गयी और उसे अपने पति के स्वभाव में आये परिवर्तन के बारे में बताया. उसने वैद्य से प्रार्थना की कि वह उसके पति का ऐसा इलाज कर दे जिससे जिससे उसका पति पहले की तरह ही प्रेमपूर्वक व्यवहार करने लगे. वैद्य ने लक्ष्मी की समस्या सुन उसे तीन दिन बाद आने को कहा.

तीन दिन बाद जब लक्ष्मी उस वैद्य के पास पहुंची तो वैद्य ने कहा कि तुम्हारे पति की बीमारी बहुत ही भयंकर है और उसे ठीक करने के लिए एक खास प्रकार की दवा तैयार करनी होगी.  वैद्य ने आगे कहा कि उसे ये दवा तैयार करने के लिए जिन्दा शेर का एक बाल चाहिए. अगर तुम अपने पति को ठीक करके फिर से पहले जैसा करना चाहती हो तो तुम्हे कहीं से भी मुझे जिंदा शेर का एक बाल लाकर देना होगा तभी मैं ये खास दवा तैयार कर पाऊँगा, जिसे खाते ही तुम्हारा पति बिलकुल पहले जैसा हो जायेगा.

लक्ष्मी तो जिंदा शेर के बाल की बात सुनकर ही सहम गयी और लाने में असमर्थता जाहिर करके चली आई. दूसरे दिन वह फिर वैद्य के पास पहुंची और उससे कोई और इलाज बताने की प्रार्थना की. वैद्य ने साफ़ साफ़ कहा कि तुम्हारे पति का इलाज सिर्फ जिंदा शेर के बाल से ही संभव है, यदि ला सकती हो तो लाओ अन्यथा तुम्हारा पति जिस हाल में है उसी हाल में उसके साथ रहो.

वैद्य के मुंह से साफ़ साफ़ ऐसी बात सुनकर आखिर लक्ष्मी जिंदा शेर का बाल लाने को कहकर चली आई.

अगले दिन वह हिम्मत करके एक कटोरी में मांस लेकर पास के एक जंगल की तरफ गयी. वहाँ जंगल में उसे एक गुफा नज़र आई, जहाँ से उसे शेर की गुर्राहट सुनाई दी. उसे लगा जरूर इस गुफा में कोई शेर रहता होगा, पर वो वहां मांस रखने की हिम्मत नहीं कर पाई और ऐसे ही वहां से वापस घर चली गयी. घर आकर उसे लगा ऐसे तो वो कभी भी शेर का बाल लेकर नहीं आ पायेगी और उसके पति का इलाज नहीं हो पायेगा। वो पूरी रात इसी के बारे में सोच सोच कर परेशान होती रही.

अगले दिन फिर से उसने हिम्मत की और एक कटोरी में मांस लेकर जंगल की तरफ रवाना हो गयी। जंगल में पहुंचकर हिम्मत करके वह चुपचाप दबे पांव गुफा के पास गयी और गुफा के सामने कटोरी रखकर तुरंत ही वहां से वापस घर आ गयी।  अगले दिन फिर से उसने ऐसा ही किया, धीरे-धीरे यही उसका नियम बन गया। वह हर रोज जंगल जाती, गुफा के पास पहुँचती, एक दिन पुरानी कटोरी उठाती और मांस से भरी नई कटोरी रखकर दबे पांव वहां से निकलकर वापस अपने घर लौट आती. ऐसा करते उसे कई दिन हो गए लेकिन अभी तक उसका शेर से कभी सामना नहीं हुआ था.

धीरे – धीरे लक्ष्मी का डर कम होने लगा. अब वो बहुत इत्मिनान से जंगल जाती और मांस की कटोरी गुफा के बाहर रखकर आ जाती. कुछ दिनों तक ऐसा ही करते रहने के बाद एक दिन उसने देखा कि शेर गुफा में बाहर की तरफ ही बैठा है. लक्ष्मी हिम्मत करके धीरे-धीरे गुफा की तरफ बढ़नी लगी। शेर ने उससे कुछ नहीं कहा. लक्ष्मी ने मांस से भरी कटोरी वहां रखी और खाली कटोरी लेकर वहां से रवाना हो गयी.

Storybird.com

इसी प्रकार कई और दिन बीत गए। लक्ष्मी के प्रति शेर का स्वभाव दोस्ताना हो गया, वो कभी भी उसके आने पर आक्रामक नहीं होता. शेर के इस दोस्ताना व्यवहार के चलते अब लक्ष्मी कभी-कभी उसे सहला भी देती थी. लक्ष्मी को शेर के पास आते जाते करीब छह महीने बीत गए तब उसे लगा कि अब वह शेर के बाल काट सकती है. अगले दिन वह अपने साथ एक छोटा चाकू छुपाकर ले गई और शेर को सहलाते-पुचकारते हुए लक्ष्मी ने उसके कुछ बाल काट लिए.

शेर का बाल मिलते ही लक्ष्मी तुरंत वैद्य के पास पहुँच गई और उसे शेर के बाल दिखाए. वैद्य ने उससे पूछा कि उसने ये शेर के बाल कैसे हासिल किये. लक्ष्मी ने वैद्य को अपने 6 महीने की पूरी कहानी सुना दी. लक्ष्मी की पूरी कहानी सुनने के बाद वैद्य ने उसी समय शेर के बाल को आग के हवाले कर दिया और लक्ष्मी को समझाते हुए कहा कि इंसान शेर से ज्यादा खतरनाक नहीं हो सकता. यदि वह प्यार और धैर्य से शेर को अपने वश में कर सकती है तो पति को क्यों नहीं ?

लक्ष्मी को अपने पति की बीमारी का इलाज मिल गया था.

(Moral : प्यार ही वह अहसास है जिससे किसी को भी अपना बनाया जा सकता है. )

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY