सिकंदर और फ़कीर (Moral Story)

सिकंदर और फ़कीर (Moral Story)

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सिकंदर इतिहास के उन गिने-चुने महान योद्धाओं में से एक है, जिसका नाम सारी दुनिया जानती है. एक बार जब सिकंदर अपने युद्ध अभियान से रेगिस्तान के रास्ते वापस लौट रहा था तो उसके एक सैन्य अधिकारी ने एक पहुंचे हुए फ़कीर के बारे में बताया और कहा कि उनका स्थान नजदीक ही है, यदि आप चाहें तो उनके दर्शन कर लें. 

sikandar
Image- murugan.org

सिकंदर ने सैन्य अधिकारी को आदेश दिया कि उस फकीर को सिपाही भेजकर यहीं बुलवा ले. जब सिपाही फकीर को लेने गए तो फकीर ने यह कहकर आने से मना कर दिया कि वह किसी सिकंदर को नहीं जानता.

सिकंदर को बुरा तो लगा परन्तु क्रोध को पीकर वह अगले दिन सुबह खुद ही अपने घोड़े पर बैठकर फ़कीर के स्थान पर जा पहुंचा.

उसके अंगरक्षक ने फ़कीर को जाकर बताया कि सिकंदर महान तुमसे मिलने आये हैं.  सिकंदर पूरी तरह राजाओं की वेशभूषा में था फिर भी उसे देखकर फ़कीर न तो सम्मान में उठ कर खड़ा हुआ और न ही सलाम किया, बल्कि उलटे उसे देखकर हँसने और लगा.

सिकंदर को अपमान महसूस हुआ और वह क्रोधित होकर फ़कीर से बोला – “या तो तुम मुझे जानते नहीं हो, या फिर तुम्हारी मौत आई है वरना सिकंदर महान के सामने यूँ हँसने की जुर्रत न करते !”

यह सुनकर फ़कीर और भी जोर-जोर से हँसने लगा और बोला – “सिकंदर महान ! पर मुझे तो तुममें कोई महानता नज़र नहीं आती … मुझे तो तुम बड़े ही दीन-हीन और दरिद्र मालूम होते हो …!”

सिकंदर बोला – “मूर्ख फ़कीर ! तुझे मालूम नहीं है कि मैंने पूरी दुनिया को जीत लिया है और हर कोई मेरी तलवार का लोहा मानता है !”

फ़कीर बोला – “ऐसा कुछ नहीं है, तुम एक साधारण इंसान ही हो … फिर भी तुम कहते हो तो मैं एक प्रश्न पूछता हूँ, उसका उत्तर दो. मान लो तुम किसी रेगिस्तान मे फंस गये और दूर दूर तक तुम्हारे आस पास कोई पानी का स्रोत नहीं है और कोई भी हरियाली नहीं है जहाँ तुम पानी खोज सको तो तुम एक गिलास पानी के लिए इस राज्य में से क्या दे दोगे ?”

सिकंदर ने कुछ देर सोच-विचार किया फिर बोला – “मैं अपना आधा राज्य दे दूंगा …”

फ़कीर – “और अगर मैं आधे राज्य में न मानूँ तो ?”

सिकंदर ने फिर सोचा और बोला – “इतनी बुरी हालत में तो मैं अपना पूरा राज्य भी दे दूंगा …”

फ़कीर फिर हँसने लगा और बोला – “इसका मतलब है तेरे राज्य का कुल मूल्य है ‘बस एक गिलास पानी’, और तू खुद को महान कहता घूम रहा है …!”

“अरे मूर्ख”, फ़कीर आगे बोला, ” वक़्त पड़ जाये तो एक गिलास पानी के लिए भी  तेरा राज्य काफी नहीं होगा फिर रेगिस्तान में खूब चिल्लाना  ‘महान सिकंदर महान सिकंदर’ पर यहाँ रेगिस्तान में कोई नहीं सुनेगा ! तेरी सारी महानता बस एक भ्रम है, और कुछ नहीं !”

सिकंदर को अपनी भूल का अहसास हो गया. उसका गर्व चूर-चूर हो चुका था. उसने फकीर से क्षमा मांगी और वापस राजधानी लौट गया.

 

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