रहस्यमयी गाँव जहां लोग चलते चलते सो जाते हैं और हफ़्तों सोये...

रहस्यमयी गाँव जहां लोग चलते चलते सो जाते हैं और हफ़्तों सोये रहते हैं

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दुनिया कई अबूझ रहस्यों से भरी है. कुदरत के इन रहस्यों में से कुछ को सुलझाने में विज्ञान को सफलता मिली है लेकिन अब भी ऐसे कई रहस्य सामने आते रहते हैं जिनके आगे विज्ञान असहाय सा खड़ा नजर आता है.

ऐसी ही एक जगह है कज़ाकिस्तान का एक गाँव कलाची. बीते कुछ सालों से इस गाँव में एक अजीबोगरीब समस्या उत्पन्न हुई है जिसका कोई ठीक ठीक कारण वैज्ञानिकों को समझ नहीं आया है. इस गाँव के लोगों को चलते चलते सो जाने की बीमारी हो गई है.

जी हाँ, वैसे तो हम सभी को सोना बहुत पसंद होता है. पर नींद अगर वक़्त बेवक्त और अचानक आने लगे तो फिर ये मुसीबत बन जाती है. कलाची के लोगों के साथ ऐसा ही कुछ हो रहा है.

प्रतीकात्मक चित्र

कजाकिस्तान के 810 लोगो की आबादी वाले गाँव कलाची में  जाते ही अचानक नींद आने लगती है. यहाँ 200 से अधिक लोग इस रहस्यमय नींद से ग्रसित है और ये संख्या दिन प्रतिदिन ओर अधिक बढ़ती जा रही है.

प्रथम बार यह सिलसिला वर्ष 2010 में आरम्भ हुआ जब इस गाँव के लोग कही भी अचानक सोने लगे . और नींद भी ऐसी वैसी नहीं बल्कि हफ़्तों तक न टूटने वाली नींद. ख़ास बात ये कि जागने पर आदमी को कुछ याद भी नहीं रहता कि वह कब से सो रहा था या उसके साथ क्या हुआ. कुछ लोग तो सोते सोते ही मृत्यु को प्राप्त हो गए.

प्रतीकात्मक चित्र

समस्या बढ़ी तो वैज्ञानिको ने इस नींद के रहस्य को सुलझाने प्रयास किया. परीक्षण से पता चला कि कालाची के आसपास कार्बन मोनो ऑक्साइड और हाइड्रो कार्बन का स्तर बढ़ने से ऑक्सीजन की मात्र कम हो गई जो इस नींद का कारण है. हालांकि यह अवधारणा भी पूरी तरह से सही नहीं मानी गई क्योंकि नींद का असर वहाँ रहने वाले सभी लोगों पर एक समान न था.

प्रतीकात्मक चित्र

वर्ष 2015 में वैज्ञानिको ने यहाँ फिर शोध किया तो पाया कि यहा सामान्य से 10 गुना अधिक मात्रा में कार्बन मोनो आक्साइड गैस पायी है, और शायद यही कारण है कि इस गाँव के लोग इस रहस्यमय नींद का शिकार होते जा रहे है. यहाँ कार्बन मोनो आक्साइड गैस बंद पड़ी युरेनियम की खदानों से निकलती है जो कि यहा से बहुत नजदीक में उपस्थित है.

परन्तु यह तथ्य भी इस बात से फंस गया कि कार्बन मोनो आक्साइड का प्रभाव सिर्फ इंसानों पर होता है जानवरों पर क्यों नहीं ?

प्रतीकात्मक चित्र

आठ वर्षो के बाद भी कजाकिस्तान के इस गाँव का रहस्य सिर्फ रहस्य बनकर रह गया है हालांकि सरकार ने वहाँ के निवासियों को दूसरी जगह रहने का प्रबंध कर दिया है.

 

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