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एक शिक्षक, जो स्कूल न आने वाले बच्चों के घर हाथ जोड़कर मनाने पहुँच जाता है

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बच्चे अगर स्कूल जाने से डरते हैं तो उनमें एक बड़ा कारण उनका अपने शिक्षक / शिक्षकों से भय होता है. और इसका एक ही कारण है और वह है शिक्षकों द्वारा छात्रों को शारीरिक दंड देना. भारत के विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा छात्रों को शारीरिक दंड दिया जाना कोई नई बात नहीं हालांकि अब इसमें कुछ कमी आई है क्योंकि इसके खिलाफ क़ानून बन गए हैं. फिर भी गाहे बगाहे छात्रों के उत्पीडन के मामले सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर होते रहते हैं.

लेकिन अगर हम कहें कि इसी देश में एक शिक्षक ऐसा भी है जो छात्रों को दंड देना तो दूर उलटे अगर वे स्कूल नहीं आते तो उनके घर जाकर हाथ जोड़कर उन्हें स्कूल आने के लिए मनाता है तो शायद आप विश्वास नहीं करेंगे. पर ये सच है और इन शिक्षक महाशय की तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर छाईं हुई हैं.

ये हैं तमिलनाडु के विल्लुपुरम के एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर जी. बालू, जो आज देश भर के शिक्षकों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं. बालू का स्कूल छठीं कक्षा से बारहवीं तक है और इसमें तकरीबन 1 हजार बच्चे पढ़ते हैं. ज्यादातर बच्चे गरीब और मजदूर परिवारों से हैं जिनके जीवन में पढ़ाई से ज्यादा महत्व रोजी रोटी का है.

बालू चाहते हैं कि उनके स्कूल के बच्चे रोज पढ़ने आयें ताकि वे जीवन में तरक्की कर सकें. अपनी इसी सोच के तहत जब भी उनके स्कूल में कोई बच्चा अनुपस्थित होता है तो वे उसके घर जाकर हाथ जोड़कर उसे स्कूल आने के लिए मनाने पहुँच जाते हैं.

हेडमास्टर बालू डांटने, पीटने के बजाय विनम्रता का हथियार इस्तेमाल करते हैं जो अपेक्षाकृत अधिक प्रभावशाली सिद्ध होता है. हेडमास्टर के इस व्यवहार का बच्चों के साथ साथ उनके अभिभावकों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे खुद बच्चे को स्कूल भेजने को राजी हो जाते हैं.

अपने विनम्र व्यवहार से हेडमास्टर बालू ने बच्चों के साथ एक मधुर रिश्ता कायम कर लिया है और वे उनके साथ सहज अनुभव करते हैं. हमें चाहिए कि हेडमास्टर बालू की कहानी देश के हर शिक्षक तक पहुंचाएं.

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