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टैक्सी ड्राइवर सालों पहले बीमार बहिन को नहीं बचा पाया, अब खोल दिया उसी के नाम से अस्पताल

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हाल ही में कोलकाता के रहने वाले एक टैक्सी ड्राइवर सैदुल लश्कर ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जो हर भाई के लिए एक गर्व की बात है. 40 साल के सैदुल ने अपने हौसलों के बल-बूते गरीबों के लिए एक अस्पताल खोला है जहाँ इलाज़ बिल्कुल नि:शुल्क किया जाता है. लेकिन इसके पीछे त्याग और संघर्ष की एक कहानी छुपी हुई है जो आपको जरुर जानना चाहिए.

दरअसल साल 2004 में सैदुल की 17 साल की बहिन मारुफा की एक बीमारी के चलते मौत हो गई थी. मारुफा छाती के संक्रमण से पीड़ित थीं. एक मामूली टैक्सी ड्राइवर सैदुल के पास अपनी बहिन का इलाज कराने के लिए पैसे ही नहीं थे. इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने सैदुल को अन्दर से झकझोर दिया और उन्होंने तभी ठान लिया था कि अब कोई भी गरीब इलाज़ के अभाव में दम नहीं तोड़ेगा.

इसके बाद करीब 12 सालों तक सैदुल ने कड़ी मेहनत कर पाई-पाई जोड़ी. उनके इस कदम में उनकी पत्नी ने हर सम्भव मदद की. उनकी पत्नी ने अस्पताल के लिए जमीन खरीदने के लिए अपने गहने सैदुल को दे दिए. इसके अलावा सैदुल अपनी कैब में बैठने वाली सवारियों से भी दान मांगते थे. सृष्टि घोष नाम की एक लड़की ने तो सैदुल की आप-बीती सुनकर अपनी एक महीने की तनख्वाह ही उन्हें दे दी.

इतने सालों के संघर्ष के बाद आख़िरकार सैदुल का सपना इस साल फरवरी में पूरा हुआ जब इस दो मंजिला अस्पताल का नाम ‘मारुफा स्मृति वेलफेयर फाउंडेशन’ रखा गया. सैदुल ने इस अस्पताल का उद्घाटन सृष्टि से ही कराया जिन्हें वे अपनी बहन जैसा ही मानते हैं. अस्पताल में कुल आठ डॉक्टर हैं जो निशुल्क लोगों का इलाज़ करेंगे.

अस्पताल के पूरी तरह परिचालित होने के बाद करीब 100 गाँव के लोगों को इसका फायदा मिलेगा. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस शख्स की काफी तारीफ भी की.

(Source)

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