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एक बच्चे को पढ़ाने के लिए रोज 50 किमी का सफ़र तय करता है यह शिक्षक

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महाराष्ट्र के एक सरकारी अध्यापक की कहानी आज सोशल मीडिया पर छाई हुई है. वजह है इस शिक्षक का अपने कर्त्तव्य के प्रति जज्बा. यह शिक्षक अपने विद्यालय जाने के लिए रोजाना 50 किमी का सफ़र तय करता है और जिस विद्यालय में पढ़ाने जाता है वहाँ मात्र एक विद्यार्थी है.

मूलतः नागपुर के निवासी 29 वर्षीय रजनीकांत मेंढे महाराष्ट्र के भोर के चंदर गाँव में अध्यापक हैं. वे जहां रहते हैं वहाँ से अपने स्कूल तक पहुँचने के लिए उन्हें रोज 50 किमी का रास्ता तय करना पड़ता है. इसमें 12 किमी का रास्ता हाईवे से उतरकर बेहद ऊबड़खाबड़ और धूल कीचड से भरा हुआ है. 400 फीट गहरी खाई के किनारे किनारे बाइक चलाते हुए वे स्कूल पहुँचते हैं.

इस रास्ते पर गुजरते हुए उनकी जान भी कई बार जोखिम में पड़ चुकी है. एक बार तो वे बाइक सहित फिसल कर एक सांप के ऊपर गिर पड़े थे. स्कूल में भी एक बार छत से एक सांप उनके ऊपर गिर चुका है.

हैरानी की बात ये है कि इतनी परेशानी झेलने के बाद वे जिस स्कूल में पढ़ाने जाते हैं वहाँ सिर्फ 1 छात्र है. युवराज सांगले नामक यह छात्र भी उन्हें स्कूल में नहीं मिलता. उन्हें उसे ढूँढना पड़ता है. कई बार उन्हें उसे पेड़ पर से उतारकर लाना पड़ता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस गाँव में बमुश्किल 60 लोगों की आबादी है. ज्यादातर लोग गरीब व मजदूर हैं. 8 साल पहले जब रजनीकांत यहाँ पढ़ाने आये थे तब इस स्कूल में 11 बच्चे पढ़ने आते थे. पर गरीबी और उच्च शिक्षा की व्यवस्था न होने के कारण ज्यादातर बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं. रजनीकांत गाँव वालों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए समझाते हैं पर कोई नहीं भेजना चाहता.

ले देकर युवराज ही एकमात्र उनका विद्यार्थी है जिसकी रूचि स्कूल में बनाए रखने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. दो साल पहले उन्हें अधिकारीयों की और से एक 12 वोल्ट का सोलर पैनल मिला था जिसका उपयोग करते हुए उन्होंने उन्होंने उसकी खातिर एक छोटा टीवी सेट लगवाया है और टेबलेट भी खरीद कर दिया ताकि उसे ई-लर्निंग दी जा सके. फिर भी स्कूल में और बच्चे न होने के कारण अक्सर वह स्कूल आने से कतराता है.

इस शिक्षक को जज्बे को सलाम !

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