तोते की तीन सलाह

तोते की तीन सलाह

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एक आदमी के पास एक बहुत ही प्यारा और समझदार तोता था. तोता अक्सर अपने मालिक से बातें किया करता और मालिक भी उसे बहुत प्यार करता था. वह उसे चांदी के बने पिंजरे रखता और खाने के लिए जो भी चीज़ तोता चाहता, वही देता.

परन्तु तोता पिंजरे में रहकर खुश नहीं था. उसे आज़ादी चाहिए थी. वह अक्सर अपने मालिक से उसे आज़ाद करने का आग्रह करता परन्तु मालिक उससे कहता – “आज़ादी छोड़कर और कुछ भी मांग लो, मैं लाकर दूंगा.”

एक दिन तोते ने मालिक से कहा – “तुम मुझे आज़ाद कर दो इसके बदले में मैं तुम्हें तीन अनमोल सलाह दूंगा जिनसे तुम्हें बहुत फायदा होगा  !”

मालिक तोते को बहुत चाहता था, परन्तु उससे भी ज्यादा पैसे को चाहता था. उसने सोचा कि अगर तोते ने कोई ऐसी बात बता दी जिससे मैं ज्यादा धन कमा पाया तो इसे आज़ाद करने में कोई बुराई नहीं.

उसने पिंजरा खोला और बोला – “लो मैंने तुम्हें आज़ाद किया, अब बताओ वो तीन बातें ?”

तोता पिंजरे से निकल कर मालिक की हथेली पर आ बैठा और बोला – “मेरी पहली सलाह है कि ‘कभी भी पैसे का नुक्सान होने पर दुखी मत हो’ ….”

मालिक ने मुस्कुराते हुए सोचा कि ये साधारण सी बात तो हर कोई जानता है. लेकिन उसने तोता से कुछ नहीं कहा.

अब तोता उड़कर छत की मुंडेर पर जा बैठा और बोला – “मेरी दूसरी सलाह सुनो – ‘हर बात जो तुमसे कही जाए उस पर कभी भी आँख मूँद कर भरोसा मत करो !”

मालिक ने खीझ कर कहा – “कोई ऐसी बात बताओ जो मैं नहीं जानता होऊं …. ऐसी बातें तो प्रवचनों में मैंने बहुत सुनी हैं.”

तोता बोला – “मेरे पेट में दो अनमोल हीरे हैं …!”

“तुम्हारे पेट में दो अनमोल हीरे …. ?”, मालिक आश्चर्य और दुःख से चिल्लाया, “हाय मैं कितना बड़ा मूर्ख हूँ कि मैंने तुम्हें आज़ाद कर दिया ….!! इस बात का मुझे ज़िन्दगी भर अफ़सोस रहेगा ….”, और इतना कहकर वह अपना सर पकड़कर बैठ गया.

“मेरी तीसरी सलाह नहीं सुनना चाहोगे ?”, तोते ने पूछा.

“वो भी बता दो  …”, मालिक ने कडवाहट भरे स्वर में कहा.

तोता बोला – “मैंने तुम्हें पहली सलाह दी थी कि कभी भी धन के नुक्सान पर दुखी मत होना लेकिन तुम अभी-अभी मुझे छोड़ देने पर पछताने लगे ! मैंने तुम्हें दूसरी सलाह दी थी कि जो भी तुमसे कहा जाय उस पर आँख मूँद कर भरोसा मत करना लेकिन जब मैंने तुमसे कहा कि मेरे पेट दो अनमोल हीरे हैं तो तुमने बड़ी आसानी से विश्वास कर लिया ! तुमने ये नहीं सोचा कि अगर मेरे पेट में हीरे होते तो क्या मैं जिंदा रह सकता था ? इसलिए मेरी तुमको तीसरी सलाह यही है कि ‘खोपड़ी के अन्दर जो दिमाग है, उसका इस्तेमाल करना सीखो, ज़िन्दगी में सुखी रहोगे…”

और इतना कहकर तोता मुंडेर से फुर्र से उड़ गया…. मालिक को ठगा सा छोड़कर !

 

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