तीन भाई

तीन भाई

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किसी गाँव में तीन भाई रहते थे. तीनों की ही आँखों में कुछ दोष था जिससे उन्हें दिखाई बहुत कम देता था. एक दिन जब उनके पिताजी उनके लिए बहुत सारा धन छोड़कर गुजर गए तो उन तीनों में इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई कि अब रुपये-पैसे के लेनदेन की जिम्मेदारी कौन संभालेगा.

बड़ा भाई बोला – “मैं सबसे बड़ा हूँ, इसलिए आज से रुपये-पैसे की जिम्मेदारी मेरी …”

छोटा भाई चिढ़कर बोला- “आपको कुछ सूझता भी है …. ? कोई कितने रुपये दे जाएगा, कितने ले जाएगा आपको कुछ पता भी नहीं चलेगा इसलिए आज से ये सब जिम्मेदारी मैं संभालूँगा.”

मंझला भाई छोटे भाई को झिड़कता हुआ बोला – “बात तो ऐसे कर रहा है जैसे तुझे बहुत साफ़ दिखाई देता है …. ? तुम दोनों से तो मेरी नजर ठीक है इसलिए अब से मैं ही रुपये-पैसे का हिसाब अपने पास रखूंगा….”

तीनों की बहस एक पड़ोसी सुन रहा था. उसने सुझाव दिया कि क्यों न तीनों ही भाई अपनी अपनी नजर की परीक्षा कर लें … जिसकी नजर ज्यादा साफ़ हो वही रुपये पैसे का हिसाब रखे !

पडोसी ने बताया कि कल शाम को गाँव के स्कूल के गेट पर सरपंच साहब एक बोर्ड लगाने जा रहे हैं जिस पर बच्चों के लिए कोई अच्छी बात लिखी है. तुम तीनों ही कल शाम को वहाँ जाना और उस बात को पढ़ने की कोशिश करना. तुम में से जो भी उसे सही सही पढ़ लेगा वही घर का मुखिया बन जाएगा.

पडोसी की बात पर तीनों भाई सहमत हो गए और अगले दिन शाम को स्कूल में मिलने का तय करके अपने-अपने कमरों में चले गए.

थोड़ी देर बाद बड़ा भाई चुपके से घर से निकला और स्कूल जा पहुंचा. स्कूल पहुँच कर उसने एक मास्टर को बुलाया और पूछा – “क्यों भाई, सरपंच साहब कल जो बोर्ड लगाने जा रहे हैं वो बन कर आ गया क्या ?”

मास्टर – “हाँ, आ गया ?”

बड़ा भाई – “बहुत अच्छा … जरा ये तो बताओ उस पर बच्चों के लिए कौनसी अच्छी बात लिखी है ?”

मास्टर – “उस पर लिखा है – ‘सदैव ईमानदार रहो'”.

इतना सुनते ही बड़ा भाई मन ही मन खुश होता हुआ वापस अपने घर आ गया. उसने सोचा कि अब वह कल बड़ी आसानी से अपने भाइयों के सामने यही बात सुना देगा और घर का मुखिया बन जाएगा.

लेकिन बड़े भाई के घर आने के दस मिनट बाद ही मंझला भाई घर से निकला और स्कूल जा पहुंचा. उसने भी मास्टर से पूछा कि बोर्ड पर क्या लिखा है.

मास्टर ने जब बताया कि बोर्ड पर “सदैव ईमानदार रहो” लिखा है तो मंझले भाई ने आगे पूछा – “सिर्फ यही लिखा है या बोर्ड पर और कोई सजावट बगैरह भी है ?”

मास्टर ने बताया – “है क्यों नहीं ? बोर्ड के चारों तरफ फूलों वाला बॉर्डर भी बनवाया है …”

इतना सुनकर मंझला भाई भी ख़ुशी-ख़ुशी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होता हुआ घर लौट आया.

थोड़ी ही देर बाद छोटा भाई स्कूल पहुंचा और उसने भी मास्टर से बोर्ड के सम्बन्ध में जानकारी ली. मास्टर ने उसे भी बताया कि बोर्ड पर “सदैव ईमानदार रहो” लिखा है और उसके चारों तरफ फूलों वाला बॉर्डर भी है.

छोटे भाई ने आगे पूछा – “बस इतना ही ? बोर्ड पर और कुछ नहीं लिखवाया ?”

मास्टर – “अरे लिखा है न … नीचे की तरफ सरपंच साहब का नाम भी लिखा है …”

इतना सुनकर छोटा भाई भी ख़ुशी-ख़ुशी घर लौट आया.

अगले दिन शाम को तीनों भाई स्कूल के गेट पर पहुंचे. सबसे पहले बड़ा भाई गेट की तरफ इशारा करते हुए बोला – “वह देखो, बोर्ड पर लिखा है – “सदैव ईमानदार रहो”

मंझला भाई बोला – “बस इतना ही दिखाई दिया ? उसके चारों तरफ फूलों वाला बॉर्डर है वह नहीं दिखाई दे रहा है आपको ?”

अब छोटे भाई की बारी थी, वह हँसता हुआ बोला – “तुम दोनों को ही वाकई बहुत कम दिखाई देता है …. अरे नीचे सरपंच साहब का नाम भी लिखा है वो तुम दोनों में किसी को भी दिखाई नहीं दे रहा !”

तभी स्कूल के भीतर से मास्टर साहब निकल कर बाहर आये और तीनों भाइयों को देखकर बोले – “ओह, लगता है आप तीनों उस बोर्ड को देखने आये हैं … माफ़ कीजिये दरअसल सरपंच साहब आज जरूरी काम से शहर गए हुए हैं इसलिए हम उस बोर्ड को आज लगा नहीं पाए हैं …. अब उसे कल लगायेंगे !!!”

 

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