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मिर्जा ग़ालिब के 11 शेर जिन्हें हर आशिक़ को जुबानी याद रखना चाहिए

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मिर्जा गालिब की शायरी के बिना उर्दू अदब अधूरा है. मिर्जा गालिब की शायरी का सबसे ज्यादा हिस्सा फारसी में हैं. 19वीं शताब्दी के सबसे बड़े कवि और शायर मिर्ज़ा ग़ालिब अपनी लेखनी से जो कमाल कर गये वो शायद ही इतिहास में कोई और शायर कर पाया हो, और शायद ही भविष्य में कोई शख्स ऐसी कालजयी कृतियों के निशां छोड़ पाये. ग़ालिब ने जो शायरी लिखी हैं उन पर आज लोग अध्य्ययन कर रहे हैं. ग़ालिब के लेखन में यही बात निराली है कि उनके द्वारा लिखे गये शेर तब भी वास्तविक से प्रतीत होते थे और आज भी होते हैं. दौर बदलते गये लेकिन ग़ालिब की शायरी समाज को वैसे ही आईना दिखाती रही.  मिर्जा गालिब की शायरी ऐसी होती हैं जो हमारे दिल को छू जाती हैं. मिर्जा गालिब ने अपनी शायरी ज्यादा फारसी में लिखी हैं साथ ही उन्होंने उर्दू में भी लिखी है.

यहाँ हम ग़ालिब के कुछ सर्वाधिक लोकप्रिय शेर आपके लिए छांटकर लाये हैं. ये ऐसे शेर हैं जिन्हें तो जुबानी याद होना चाहिए, खासकर आशिकों को, क्या पता कब सुनाने की जरूरत पड़ जाए –

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कैसे लगे ग़ालिब के ये शेर ?

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