वकील साहब

वकील साहब

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एक वकील साहब एक एक्सप्रेस ट्रेन के एसी कोच में यात्रा कर रहे थे. उस दिन कोच में काफी कम यात्री थे और जिस कम्पार्टमेंट में वकील साहब बैठे थे उसमें तो उनके अलावा और कोई भी नहीं था.

अचानक एक महिला वहाँ आई और वकील साहब से धमकी भरे अंदाज़ में कहने लगी – “मिस्टर, तुम्हारे पास जो भी मालपानी, रूपया-पैसा, घड़ी, मोबाइल, सोने की चेन वगैरा है सब चुपचाप मुझे दे दो वरना मैं चिल्लाऊंगी कि तुम मेरे साथ छेड़छाड़ कर रहे हो…”

वकील साहब ने एक मिनट शांतिपूर्वक कुछ सोचा फिर अपने बैग से कागज़ पेन निकाला और उस पर एक तरफ लिखा – “मैं गूँगा-बहरा हूँ …. ना ही बोल सकता हूँ और ना ही सुन सकता हूँ. तुम्हें जो भी कुछ कहना है इस कागज़ पर लिख कर दो…”

महिला ने जो भी कुछ कहा था वह उस कागज़ के दूसरी तरफ लिखकर वकील साहब को पकड़ा दिया.

वकील साहब ने उस कागज़ को हिफाज़त से मोड़कर अपनी जेब में रखा और बोले – “हाँ, अब चिल्लाओ …!!!”

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