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ज्यादातर स्कूल बसों का रंग पीला ही क्यों होता है ?

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आखिर स्कूल बसों का रंग पीला ही क्यों होता है ? हो सकता है कभी ये सवाल आपके दिमाग में भी आया हो ? आपको जानकारी के लिए बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने भी प्राइवेट स्कूलों को आदेश दिए थे कि उनकी बसों का रंग पीला होना आवश्यक है. आखिर क्या खास वजह है की पीले रंग को इतनी तवज्जो दी जा रही है और इसे अपनाने के लिए बोला जा रहा है.

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पहले तो यह जान लीजिये कि स्कूल बसों का पीला रंग सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु भारत के अतिरिक्त ज्यादातर देशों में भी  स्कूल बसों का रंग पीला ही होता है. दरअसल स्कूल बसों को पीले रंग में रंगने की एक ख़ास वजह है.

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अमेरिका में साल 1930 में किये गए एक अध्ययन  के अनुसार  इसके पीछे की वजह यह है कि बाकी रंगों की तुलना में पीले रंग में 1.24 गुना ज्यादा आकर्षण होता है और अन्य किसी भी रंग की तुलना में ये आंखों को जल्दी दिखाई देता है. इसीलिए बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल बसों को पीले रंग में रंगना ज्यादा उपयोगी माना गया.

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आपने देखा होगा सुरक्षा कारणों के कारण सड़क मार्गों पर भी ट्रैफिक लाइट और खास सांकेतिक बोर्ड को पीले रंग में रंगा जाता है. कोहरे में अगर आप यात्रा करते है तब भी पीले रंग की लाइट्स ही आपके सबसे ज्यादा काम आती है. सुरक्षा कारणों के चलते ही स्कूलों की बस को पीला रंगा जाता है ताकि होने वाले हादसों को कम किया जा सके और नुकसान होने से बचाया जा सके.

साथ ही साथ भारत में साल 2012 में न्यायपालिका के द्वारा जो गाइड लाइन्स जारी की गयी उसमे कई ऐसे प्रावधान किये गए जो कि सभी स्कूलों के लिए मानना अनिवार्य है. इसके अनुसार भारत में सभी स्कूली बसों का रंग पीला होना चाहिए. बसों पर स्कूल का नाम और प्रधानाचार्य का मोबाइल नंबर अंकित होना चाहिए. बसों के भीतर प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए. जिससे की किसी आपात स्थिति में बच्चो का इलाज किया जा सके. बसों की गति का निर्धारण करते हुये उसमें स्पीड गवर्नर होना चाहिए. स्कूल बस चालक का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए।

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