Home Knowledge बेंगलुरु के वैज्ञानिक ने बना ली कोरोना को मारने वाली डिवाइस

बेंगलुरु के वैज्ञानिक ने बना ली कोरोना को मारने वाली डिवाइस

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दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। अब तक न तो इसका कोई इलाज सामने आ पाया है और न ही इससे बचने का कोई कारगर तरीका ।

लेकिन ऐसे में बेंगलुरु के वैज्ञानिक डॉ राजा विजयकुमार ने एक ऐसी डिवाइस बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है जो कोरोना के प्रसार को रोकने में रामबाण तरीका कहा जा सकता है। खुशी की बात ये है उनकी डिवाइस के सभी टेस्ट पूरे हो चुके हैं और manufacturing phase में जाने की स्थिति में पहुँच चुकी है।

Shycocan नाम की एक छोटे ड्रम के आकार की ये डिवाइस न सिर्फ सार्वजनिक स्थलों जैसे ऑफिस, माल, सिनेमाघर आदि में लगाई जा सकती है बल्कि घर में भी लगाई जा सकती है। ये एक डिवाइस अपने आसपास के 10 हजार घनमीटर के क्षेत्र में मौजूद 99.9 प्रतिशत कोरोना वाइरस को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम है।

अब आपके दिमाग में ये सवाल जरूर आ रहा होगा ये डिवाइस काम कैसे करती है, इसके पीछे क्या साइन्स है। तो आइये संक्षेप में आपको बताते हैं।

दरअसल कोरोना वाइरस की संरचना एक खास तरह के प्रोटीन से बनी होती है । इस प्रोटीन में पॉज़िटिव पोटेन्शियल होता है और स्वाभाविक तौर पर ये नेगेटिव पोटैन्श्यल की तलाश में रहता है। जैसे ही ये किसी इंसान के शरीर के संपर्क में आता है तो वहाँ इसे नेगेटिव पोटैन्श्यल वाली सेल्स मिल जाती हैं और ये उनसे चिपक जाता है। वहाँ ये अपना डीएनए रिलीज करता है और अपनी संख्या बढ़ाने लगता है। इसी को हम कहते हैं कि कोरोना का संक्रमण हो
गया है। यानि कोरोना वाइरस में मौजूद प्रोटीन का जो पॉज़िटिव पोटैन्श्यल है, संक्रामण में उसकी भूमिका सबसे अहम है।

Shycocan डिवाइस कोरोना के प्रोटीन में मौजूद उस पॉज़िटिव पोटैन्श्यल को खत्म करने का ही काम करती है। ये डिवाइस अपने आसपास के वातावरण में एलेक्ट्रोन्स रेलीज़ करती है जिनमें नेगेटिव पोटैन्श्यल होता है। अब ऐसे में यदि उस स्थान पर कोरोना वाइरस मौजूद है तो ये एलेक्ट्रोन्स उसके पॉज़िटिव पोटैन्श्यल से मिलकर उसे neutralise कर देते हैं। एक बार neutralise होने के बाद कोरोना वाइरस सेल्स से चिपकने की अपनी क्षमता खो देता है और संक्रमण फैलाने योग्य नहीं रह जाता। फिर अगर ये किसी इंसान के शरीर के भीतर चला भी जाये तो कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

न्यूज़18 मीडिया की खबर के अनुसार इस डिवाइस का प्रोटोटाइप विगत मार्च में ही बना लिया गया था और तब से अमेरिका में इसकी टेस्टिंग चल रही थी। अच्छी खबर ये है कि करीब 26 तरह के परीक्षणों से गुजरने के बाद ये डिवाइस सभी पर खरी उतरी है और इसे अमेरिका की संस्था FDA की मंजूरी मिल गई है।

ये सही है कि ये डिवाइस किसी कोरोना से ग्रसित व्यक्ति का इलाज नहीं कर सकती लेकिन उससे किसी और को ना हो, इसकी रोकथाम बखूबी कर सकती है। एक बार ये डिवाइस बाजार में आ गई तो फिर सार्वजनिक जगहों जैसे Malls, hospitals, ऑफिसेज आदि जगहों पर संक्रमण होने का खतरा ना के बराबर रह जाएगा।

सबसे विशेष बात ये कि ये डिवाइस ज्यादा मंहगी भी नहीं होगी और आम आदमी भी इसे आसानी से अफफोर्ड कर पाएगा। न्यूज18 की खबर के अनुसार घरेलू उपयोग की डिवाइस की कीमत 600 रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है जो कोरोना के खतरे को देखते हुये ज्यादा बड़ी रकम नहीं है।

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